Jharkhand में Election को लेकर महौल गरमाया हुआ है। Jharkhand के राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। Jharkhand विधानसभा में कुल 81 सदस्य है। ऐसे में यदि दो उम्मीदवार Election मैदान में होते है,तो जीत के लिए लगभग 28 मतों की आवश्यकता होगी हमारे गठबंधन में झामुमो,कांग्रेस,राजद और अन्य सहयोगी दल शामिल है,तथा हमारे पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। इसलिए हमें पूरा विश्वास है कि इस Election में गठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगा।

सुप्रियो भट्टाचार्य अपने प्रेस वार्ता में कह कि Jharkhand के राज्यसभा की दो JMM कार्यकर्ताओं को ही मिलना चाहिए। हम 2024 से महागठंबधन धर्म निभा रहे है, Jharkhand में हमारी सरकार है तो हमारा दायित्व बनता है कि हमारे नेताओं को राज्यसभा में जाना चाहिए। इसके लिए हम अपने पार्टी के अध्यक्ष हेंमत जी से आग्रह करते है कि फैसला सोच- समझ कर ले क्यों की ये जेएमएम के गरिमा की बात है। साथ हि उन्होनें पत्रकार के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि हमनें पार्टी के लिए सेक्रीफाई के साथ एक तरफा प्यार किया है।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी गठबंधन के तहत ही लड़े गए थे। हमने झामुमो के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और सरकार का गठन किया।आगामी राज्यसभा चुनाव भी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। हमने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस बार दोनों सीटों पर झामुमो के नेताओं और समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलना चाहिए।
बता दें कि नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून है। हमारी इच्छा है कि पार्टी के समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजा जाए। बिहार विधानसभा चुनाव में हमें एक भी सीट नहीं मिली थी, इसलिए इस बार झामुमो कार्यकर्ताओं की भावना और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इस संबंध में हमने अपनी बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखी है।
सुप्रियो ने जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी उतारा है,यह उनका अधिकार है।लेकिन उनके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है। ऐसे में उचित होगा कि मुख्यमंत्री इस विषय पर अंतिम निर्णय लेगें और उम्मिद है कि फैसला हितकारक होगा।
भट्टाचार्य ने शब्दों के समाप्ती के ओर ले जाते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी बात रख सकती है, आग्रह और निवेदन कर सकती है, लेकिन जिस प्रकार कांग्रेस ने एकतरफा निर्णय लेते हुए अपना प्रत्याशी घोषित किया है, उससे गठबंधन धर्म को ठेस पहुंची है। ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में सहयोगी दलों के साथ चर्चा और सहमति बनाकर निर्णय लिया जाना चाहिए था। यही हमारी भावना है और हमने अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी है।
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