झारखंड विधानसभा परिसर में 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में विधायक कल्पना सोरेन समेत स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, बेरमो विधायक अनूप सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और अन्य लोग भी मौजूद रहे।
वन महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल, पहाड़, नदियों और समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों से है। यहां की प्रकृति और जंगल सिर्फ पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि राज्य के लोगों के जीवन, संस्कृति और परंपराओं से भी गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव जैसे आयोजन लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हैं। उन्होंने कहा कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है। लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल, उनका संरक्षण और संवर्धन भी उतना ही जरूरी है। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराने के लिए आज से ही ठोस कदम उठाने होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। विकास के साथ पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, ताकि झारखंड की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वन महोत्सव का उद्देश्य सिर्फ पौधारोपण तक सीमित नहीं होना चाहिए। पौधा लगाने के साथ उसके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी लोगों में उसी तरह का उत्साह होना आवश्यक है। उन्होंने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति अपने स्तर पर पौधा लगाए और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव के कारण झारखंड विधानसभा परिसर, उसके आसपास के क्षेत्रों और राज्य के विभिन्न हिस्सों में हरियाली बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि धरती को हरा-भरा बनाने में सरकार के साथ आम लोगों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि लोग व्यक्तिगत रूप से इस अभियान से जुड़ते हैं और पौधारोपण के साथ उनके संरक्षण का संकल्प लेते हैं, तो झारखंड की प्राकृतिक संपदा और जैव-विविधता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना आसान होगा।
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