चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर जारी बहस के बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। संगठन ने 48 घंटे का समय देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में इस्तीफा नहीं दिया गया तो झारखंड समेत देशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के रांची लोकसभा प्रभारी और झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता ईशान कुमार झा तथा कोर सदस्य मोहिन खान ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन ने दावा किया कि पिछले 10 महीनों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से लिए गए कुछ फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्तों द्वारा आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
संगठन ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई 14 आपत्तियों को दरकिनार करते हुए नियमों में ढील दी गई। CJP ने इसे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए CEC के इस्तीफे के साथ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की है।
SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक की मांग

CJP ने Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। संगठन ने पुरानी मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को बहाल करने की भी मांग की है।
संगठन का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। CJP ने मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई है।
2023 के चुनाव संबंधी कानून पर भी आपत्ति
CJP ने 2023 में पारित चुनाव संबंधी कानून को वापस लेने की मांग की है। संगठन का दावा है कि इस कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई से संरक्षण दिया गया है।
CJP का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कानून में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
48 घंटे का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

CJP ने कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो झारखंड समेत देश के अन्य राज्यों में जमीनी स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
संगठन ने कहा कि वह चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना अभियान आगे भी जारी रखेगा।
शिक्षा से चुनावी अधिकार तक अभियान
ईशान कुमार झा ने बताया कि CJP ने अपने अभियान की शुरुआत शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर की थी। संगठन की ओर से ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो आंदोलन’ चलाए जाने की बात कही गई।
उन्होंने पाकुड़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाने का उल्लेख किया। संगठन के अनुसार, इसके बाद झारखंड सरकार के एक शिक्षा अधिकारी की ओर से संगठन के सदस्यों के स्कूलों में प्रवेश पर रोक से संबंधित नोटिफिकेशन जारी किया गया था।
CJP ने खुद को गैर-राजनीतिक दबाव समूह बताते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। संगठन का दावा है कि शिक्षा, मतदान के अधिकार और नागरिकों के अन्य बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर उसका अभियान जारी रहेगा।
कई राज्यों के मतदाता आंकड़ों का किया उल्लेख
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP प्रतिनिधियों ने पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और केरल के मतदाता आंकड़ों का भी उल्लेख किया। संगठन ने चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने का आरोप लगाते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
संगठन ने कहा कि मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी है। CJP ने चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों के समाधान के लिए कार्रवाई की मांग की है।
संगठन ने यह भी कहा कि झारखंड में विभिन्न आंदोलनों में शामिल छात्रों और युवाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में वह काम कर रहा है।










