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झारखंड में लगभग 17 से 18 जिलों में की जा रही अफिम की खेती: जानिए क्या है पूरी सच्चाई?

On: June 6, 2026 6:26 PM
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झारखंड में लगभग 17 से 18 जिलों में की जा रही अफिम की खेती : जानिए क्या है पूरी सच्चाई?
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झारखंड में  लगभग 17 से 18 जिलों में अफिम की खेती की जाती है।लेकिन कुछ 8 जिले इसके मुख्य केंद्र हैं जैसे इनमें से सबसे प्रभावित जिला रहे।चतरा, खूंटी, और लातेहार बता दें की इनमें सबसे ज्यादा अफिम की खेती के लिए खूंटी जिलें को बदनाम किया जाता है। जानकारी के अनुसार पिछले कई सालों में झारखंड में अफीम की खेती की जा रही है। जो की नशीले पदार्थ बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मुख्य फ़सल है।जीसके ख़िलाफ़ रांची पूलिस द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई है।

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अगर आकड़ो की बात करें  कि इस दौरान पुलिस फ़ोर्स ने 37,000 एकड़ में फैली अफ़ीम की फ़सल को नष्ट किया है। मीडिया रिपोर्टो के अनुसार ब्राउन शुगर जैसे दूसरे नशीले पदार्थों के ख़िलाफ़ भी बड़ी कार्रवाई की गई है।मिली जानकारी के अनुसार 2023 और मई 2026 के बीच झारखंड में रिकॉर्ड 37,000 एकड़ अफ़ीम की फ़सल नष्ट की गई। राज्य के मुख्य अफ़ीम उत्पादक ज़िलों  जैसे चतरा, खूंटी, राँची, लातेहार, पलामू और हज़ारीबाग में अफ़ीम तस्करों को ₹100 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।

साथ ही अवैध अफिम के खेता को लेकर झारखंड के 14 ज़िलों में ऑपरेशन चलाए गए जिसके के ज़रिए भारी मात्रा में अफ़ीम नष्ट की गई है।पिछले तीन सालों में न सिर्फ अफीम की फसल नष्ट की गई,बल्कि नारकोटिक्स एक्ट के तहत लगभग 500 मामले दर्ज किए गए और 315 से ज़्यादा लोगों को जेल भेजा गया। खूंटी ज़िला लंबे समय से अफ़ीम की खेती के लिए बदनाम रहा है। ज़िले के ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम इलाके का फायदा उठाकर तस्कर लगातार सैकड़ों एकड़ में अफीम की खेती करते रहे हैं। नतीजतन, पिछले तीन सालों में पुलिस ऑपरेशन के दौरान सबसे ज़्यादा अफीम खूंटी में ही नष्ट की गई।

अफिम की खेती में खूंटी ज़िला राज्य में पहले स्थान पर आता है,लेकिन झारखंड पुलिस ने इस पर नकेल लगाने का काम किया है। पिछले तीन सालों में 17,000 एकड़ अफ़ीम की फ़सल नष्ट की गई। इस दौरान खूंटी पुलिस ने सबसे ज़्यादा तस्करों को गिरफ़्तार किया और 100 से ज़्यादा लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई है। वहीं इसी तीन साल की अवधि में अफीम की फसल नष्ट करने के मामले में चतरा ज़िला राज्य में दूसरे स्थान पर है।

इसी बीच 2023 और 26  के अप्रैल में ,  चतरा में लगभग 7,000 एकड़ में फैली अफ़ीम की फ़सल नष्ट की गई और 35 से ज़्यादा लोगों को जेल भेजा गया। CID के डेटा से पता चलता है कि तस्करों द्वारा उगाई गई फ़सल को नष्ट करने और पोस्ता भूसा (डोडा) व प्रोसेस्ड अफ़ीम ज़ब्त करने से तस्करों को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2026 के बीच 84 किलोग्राम प्रोसेस्ड अफीम (बाज़ार में कीमत ₹84 करोड़) और 42,000 किलोग्राम पोस्ता भूसा (कीमत ₹22 करोड़) नष्ट किया गया।

दूसरे शब्दों में, इन तीन वर्षों में ज़ब्त किए गए अवैध सामान की कीमत ₹100 करोड़ से ज़्यादा थी। इसके अलावा, 37,000 एकड़ में लगी अफीम की फसल नष्ट की गई। नतीजतन, पिछले चार वर्षों में अफीम तस्करों को ₹200 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हुआ है। CID ने अब झारखंड में साल भर अफीम की खेती पर रोक लगाने के लिए एक एक्शन प्लान बनाया है। इस प्लान के तहत, प्रभावित ज़िलों में ‘खेती-पूर्व अभियान’ शुरू किया गया है। इस पहल में उन इलाकों की जाँच करना शामिल है जहाँ पहले अफीम की खेती की गई थी और जहाँ फसलें नष्ट की गई थीं, ताकि यह पक्का किया जा सके कि उन इलाकों में अभी अफीम की खेती की कोई तैयारी नहीं चल रही है।

अगर CID  का माने तो अभियान में शामिल ज़िले है- रांची, खूंटी, हज़ारीबाग़, चतरा, पलामू, लातेहार, पश्चिमी सिंहभूम (चाइबासा) और सरायकेला-खरसावां। बताया गया है कि अभियान में पिछले साल अफीम की खेती के मामलों की समीक्षा करना और वांछित संदिग्धों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करना शामिल होगा।

इसमें अफीम से जुड़े मामलों में फरार लोगों के खिलाफ संपत्ति ज़ब्त करने की कार्रवाई करना भी ज़रूरी बताया गया है। पत्र में प्रभावित ज़िलों के पुलिस अधीक्षकों (SPs) को अपने-अपने इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया है। खास तौर पर यह बात प्रचारित करने के निर्देश दिए गए हैं कि अफीम की अवैध खेती में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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