Home झारखंड बिहार राजनीति मनोरंजन क्राइम हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

कोडरमा के मसनोडीह के आम के दीवाने हुए अमेरिका के लोग

On: June 9, 2026 4:06 PM
Follow Us:
कोडरमा के मजनू डी के आम के दीवाने हुए अमेरिका के लोग
---Advertisement---

झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित मसनोडीह गांव आज अपने स्वादिष्ट और प्राकृतिक रूप से पके आमों के कारण नई पहचान गढ़ रहा है। करीब छह दशक से यहां आम की खेती की जा रही है और आज यह गांव क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध आम बागानों में शुमार हो चुका है। यहां के आम न केवल लोगों के स्वाद को लुभा रहे हैं बल्कि अपनी मिठास से रिश्तों में भी मिठास घोल रहे हैं। यही वजह है कि इन आमों की मांग अब देश की सीमाओं को पार कर विदेशों तक पहुंच गई है।

add

मसनोडीह में लगभग 10 बड़े आम बागान हैं जहां तीन हजार से अधिक आम के पेड़ मौजूद हैं। इन दिनों सभी पेड़ फलों से लदे हुए हैं और विशेष रूप से ‘गाछपकु’ यानी पेड़ पर प्राकृतिक रूप से पके आमों की मांग सबसे अधिक है। आम के शौकीन लोग दूर-दूर से यहां पहुंच रहे हैं और सीधे बागानों से ताजे आम खरीद रहे हैं।

स्थानीय खरीदार रोहित कुमार बताते हैं कि यहां मिलने वाले आमों का स्वाद बाजार में बिकने वाले आमों से बिल्कुल अलग है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। मसनोडीह के आमों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इनका पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से तैयार होना है। आमों को पकाने के लिए किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाता है। यही वजह है कि ये आम स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माने जाते हैं।

इन दिनों बागानों में स्थानीय ग्राहकों के अलावा फोन और ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाले ऑर्डरों के अनुसार भी आमों की तुड़ाई की जा रही है। यहां के बागानों में एक दर्जन से अधिक प्रजातियों के आम उपलब्ध हैं, जो ग्राहकों को विविध स्वाद का अनुभव कराते हैं। बागान मालिक विनय सिंह और रमाकांत सिंह बताते हैं कि प्राकृतिक रूप से तैयार होने वाले इन आमों की मांग हर साल बढ़ रही है और ग्राहक विशेष रूप से इन्हीं आमों की तलाश में यहां पहुंचते हैं।

मसनोडीह की पहचान अब केवल कोडरमा या झारखंड तक सीमित नहीं रही। यहां के आमों की मांग रांची, पटना और दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक पहुंच चुकी है। दूर-दराज के ग्राहकों को ट्रेन और बस के माध्यम से ऑर्डर पर आम भेजे जाते हैं।
बागानों की देखरेख करने वाले राजू मेहता बताते हैं कि पिछले वर्ष कोडरमा के एक व्यक्ति ने अमेरिका में रहने वाले अपने परिजनों के लिए 30 किलो आम मंगवाया था। इस वर्ष भी वही परिवार मसनोडीह के आमों का ऑर्डर दे चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि गांव का स्वाद अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।

मसनोडीह के इन बागानों में मालदा, जर्दालू, गुलाब खास, बम्बईया, हिमसागर, किशुन भोग, बेलखास, मणिका, सीपिया और फजली जैसी प्रसिद्ध किस्मों के आम मौजूद हैं। इसके अलावा अचार बनाने के लिए सुकूल आम भी यहां उगाए जाते हैं। करीब 60 वर्ष पूर्व क्षेत्र के जमींदार स्वर्गीय धर्मनारायण सिंह ने बंगाल की ग्लोबल नर्सरी से आम के पौधे मंगवाकर यहां रोपण कराया था। समय के साथ यह पहल एक विशाल विरासत में बदल गई। आज उसी परिवार की चौथी पीढ़ी इन बागानों की देखरेख कर रही है और आम की खेती से आर्थिक लाभ अर्जित करने के साथ-साथ अपनी पारंपरिक धरोहर को भी संजोए हुए है।

Also Read- धनबाद में मैथन मुकुल पंप के पास ब्रिज पर ऑटो और बाइक में सीधी टक्कर में एक की मौत

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment