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झारखंड का अपराध सिर्फ झारखंड तक ही सीमित नहीं : विदेशों तक फैल रहे है झारखंड के criminal gangs

On: June 11, 2026 5:52 PM
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झारखंड का अपराध सिर्फ झारखंड तक ही सिमीत नहीं : विदेशों तक फैल रहे है झारखंड के criminal gangs
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झारखंड का अपराध सिर्फ झारखंड तक ही सिमीत नहीं बल्की इसका विस्तार विदेशों में भी धीरे -धीरे criminal gangs फैलते जा रहा है, भले ही अपराधी विदेश में बैठे है लेकिन निशाना झारखंड को ही बनाए रखे है। कई कुख्यात criminal gangs  विदेश में रहकर राज्य में दहशत फैला रहे हैं।हालांकि मयंक सिंह जो एक अपराधी कहे जाते है उसको गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन कई अन्य criminal gangs के अपराधी अभी भी विदेश से झारखंड में criminal gangs आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

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अब इन अपराधियों को गिरफ्तार करने और उन्हें  वापस  लाने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की जायेगी ।CID ने झारखंड के सभी जिलों के SSP और SP को पत्र लिखकर विदेश भाग चुके फरार अपराधियों के बारे में पूरी जानकारी मांगी है। पत्र में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे विदेश भाग चुके इन गैंगस्टर-अपराधियों की प्रोफाइल तैयार करें और उन्हें मुख्यालय में जमा करें। इन प्रोफाइलों के लिए एक खास फॉर्मेट तैयार किया गया है इसमें अपराधी का नाम, पिता का नाम, पासपोर्ट नंबर, साफ रंगीन फोटो और झारखंड में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या जैसी जानकारी मांगी गई है।

प्रोफाइल में फरार अपराधी की हालिया ज्ञात लोकेशन खासकर वह विदेशी देश जहां वे अभी छिपे हैं और अगर उपलब्ध हों तो उनके फिंगरप्रिंट भी शामिल होने चाहिए। खबरों के अनुसार, ऐसे सभी फरार अपराधियों की सूची और प्रोफाइल पहले ही तैयार कर CID मुख्यालय को सौंपी जा चुकी है। पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि अगर किसी जिले में कोई फरार अपराधी नहीं है, तो इसकी जानकारी भी दी जानी चाहिए। CID के निर्देश के अनुसार अपराधियों की प्रोफाइलिंग खास कैटेगरी के आधार पर की जानी है,इसके लिए चार कैटेगरी बनाई गई हैं। पहली कैटेगरी आतंकवाद-रोधी (counter-terrorism) मामलों से संबंधित है; अगर झारखंड से भागा कोई अपराधी आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना कर रहा है, तो उसकी जानकारी देनी होगी। organized crime को भी इसी पहली कैटेगरी में शामिल किया गया है।

दूसरी कैटेगरी narcotics से संबंधित है, जो अपराधी विदेश भाग गए हैं और नशीले पदार्थों या ड्रग्स की तस्करी से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे हैं, वे इस कैटेगरी में आते हैं। तीसरी कैटेगरी आर्थिक अपराधों (economic offenses) के लिए है, जिसमें वे अपराधी शामिल हैं जो वित्तीय धोखाधड़ी करने के बाद देश से भाग गए हैं। इसके अलावा, चौथी कैटेगरी में साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। मयंक सिंह, एक बड़ा अपराधी जो विदेश से अपना गैंग चलाता था, उसे झारखंड पुलिस की मदद से अजरबैजान में गिरफ्तार किया गया और बाद में भारत वापस लाया गया।

हालांकि मयंक सिंह अभी झारखंड की जेल में बंद है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रंगदारी कॉल (extortion calls) का रैकेट बंद नहीं हुआ है। आधे दर्जन से अधिक अपराधी जिनमें कुख्यात प्रिंस खान भी शामिल हो सकते है, विदेश से काम कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय कॉल के जरिए झारखंड के व्यापारियों को धमकी दे रहे हैं; पुलिस के लिए उन्हें पकड़ना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, झारखंड के आधा दर्जन गैंगस्टर या उनके गुर्गे अभी विदेश में रह रहे हैं। देश से भागने वाले गैंगस्टरों में सबसे कुख्यात प्रिंस खान है, और उसके बाद राहुल सिंह का नाम आता है। इसके अलावा, कई बड़े गैंग के सदस्य भी विदेश चले गए हैं। ऐसी खबरें हैं कि कुख्यात प्रिंस खान पाकिस्तान भाग गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

यह बात जगजाहिर है कि झारखंड में आधा दर्जन से ज़्यादा संगठित अपराधी गिरोहों के लिए अवैध कमाई का मुख्य ज़रिया रंगदारी (extortion) है। बड़े व्यापारियों को फ़ोन पर धमकी देना और उनके कारोबार की जगहों पर गोलीबारी करवाना, रंगदारी वसूलने के तरीकों में शामिल हैं। जब राज्य का कोई अपराधी किसी व्यापारी को धमकी देने के लिए फ़ोन करता है, तो वह अक्सर पुलिस की टेक्निकल सर्विलांस यूनिट की नज़र में आ जाता है। इसलिए, कुख्यात अपराधी अमन साहू जो कि अब मृत हो चूके है, ऐसे व्यक्ति की तलाश करने लगा जो देश के बाहर से रंगदारी के लिए फ़ोन कर सके।

साल 2020 तक, अमन साहू ने बिहार के कुछ बड़े अपराधियों से संपर्क बना लिया था और अंतरराष्ट्रीय अपराधी लॉरेंस बिश्नोई के साथ भी जुड़ गया था। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि बिहार के इन्हीं बड़े अपराधियों ने मयंक को अमन साहू से मिलवाया था। इसके बाद यह तय हुआ कि मयंक मलेशिया और दुबई जैसी जगहों पर रहेगा और वहां से अमन गैंग के लिए रंगदारी के फ़ोन करेगा। अमन साहू के संपर्क में आने और लॉरेंस से निर्देश मिलने के बाद, मयंक सिंह मलेशिया चला गया और अंतरराष्ट्रीय नंबरों का इस्तेमाल करके झारखंड में रंगदारी के फ़ोन करने लगा। झारखंड में ऐसे  कई अपराधी  है जो एक नकाब में रह कर फिरोती मांगने का काम करते  है, अभी इसी तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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