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देश में लगभग 89 पेपर लीक(paper leaks) के मामले आय सामने : 5 वर्षों में 15 राज्यों के भीतर 41 पेपर लीक के मामले

On: June 24, 2026 12:40 PM
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देश में लगभग 89 पेपर लीक(paper leaks) के मामले आय सामने : 5 वर्षों में 15 राज्यों के भीतर 41 पेपर लीक के मामले
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देश में दिनों – दिनों  देश  पेपर लीक (paper leaks)  के मामले को बढ़ते देख । झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने देश में परीक्षाओं की बदहाली, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि साल 2014 से 2024 के बीच देश में लगभग 89 पेपर लीक (paper leaks) के मामले सामने आए, जिसके कारण 48 बार दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ीं। उन्होंने कहा कि एक अन्य अध्ययन के अनुसार, महज 5 वर्षों में 15 राज्यों के भीतर 41 पेपर लीक (paper leaks) हुए। इससे मात्र 1 लाख से कुछ अधिक पदों के लिए संघर्ष कर रहे करीब 1.4 करोड़ अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया। जबकि सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 में 3 से 10 साल की कैद और 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का नियम है। इसके बावजूद राजस्थान समेत कई राज्यों में पेपर लीक (paper leaks) नहीं रुके, जो यह दर्शाता है कि सिर्फ कानून बना देने से जमीन पर बदलाव नहीं आया।चार बड़ी परीक्षाओं में हुई धांधली के कारण 1 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए।

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नीट यूजी 2026 के लगभग 24 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुए और अब मामला सीबीआई जांच और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसी तरह से यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2024 पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द हुई, जिससे 48 लाख छात्र प्रभावित हुए। सीटेट 2021 पेपर लीक की वजह से 28 लाख से अधिक उम्मीदवारों को झटका लगा। यूजीसी नेट 2024 परीक्षा होने के अगले ही दिन इसे रद्द करना पड़ा, जिससे 11 लाख छात्र प्रभावित हुए और दोबारा परीक्षा हुई।

उन्होंने कहा कि 15-29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर सामान्य स्थिति में 10.2 प्रतिशत और साप्ताहिक आधार पर 13.8 प्रतिशत है। माध्यमिक या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त युवाओं में बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत है। स्वतंत्र शोध बताते हैं कि आज देश में सबसे ज्यादा बेरोजगार वही है जो उच्च शिक्षित स्नातक और स्नातकोत्तर हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सिस्टम की इस नाकामी की सबसे दर्दनाक कीमत देश के छात्र अपनी जान देकर चुका रहे हैं। वर्ष 2022 में देश के कुल सुसाइड केसों में से 7.6 प्रतिशत यानी लगभग 13,000 स्टूडेंट छात्रों के थे। सितंबर 2025 में जारी 2023 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा और भी भयावह होकर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। कोटा, त्रिशूर और चेन्नई जैसे प्रमुख कोचिंग सेंटरों में छात्रों की आत्महत्याओं के क्लस्टर देखे जा रहे हैं।

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