राजरप्पा पुलिस स्टेशन इलाके में लारी-बार लोंग के पास सड़क हादसा (Road accident) हुआ,कोयले से लदे एक ट्रक की टक्कर एक पैसेंजर गाड़ी से टक्कर हो गई। बता दें कि Road accident के दौरान एक म्यूज़िक बैंड पार्टी के लोग सवारी गाड़ी में सवार थे, जो एक ही परिवार के बताएं जा रहे है। बता दें Road accident में टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे से पूरे इलाके में शोक और गुस्सा है। सदर अस्पताल में मातम का माहौल है, जहां पीड़ितों के कई रिश्तेदार जमा हुए है। प्रशासन, पुलिस और मेडिकल स्टाफ की टीमें लगातार अस्पताल परिसर में मौजूद हैं। मुर्दाघर में सभी मृतकों की इनक्वेस्ट रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शव परिवारों को सौंप दिए जाएंगे। बता दें कि अशोक डोम और शक्ति डोम सगे भाई थे।

उनके नजदिकीयों ने कहा कि एक ही परिवार के तीन सदस्यों की इस हादसे में मौत हो गई, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। राजरप्पा स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) और रामगढ़ सर्कल ऑफिसर रमेश रविदास भी मौके पर मौजूद हैं। अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हुए हैं और सर्कल ऑफिसर के सामने मुआवज़े की मांग रखी है। ग्रामीणों में गुस्सा है और आशंका है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कोई फैसला नहीं हुआ, तो वे शवों के साथ सड़क जाम कर सकते हैं। हादसे के बाद ग्रामीणों ने रामगढ़-बोकारो मुख्य सड़क जाम करके विरोध प्रदर्शन भी किया था। मृतकों में एक ही परिवार के दो सदस्य शामिल थे; उनके रिश्तेदार, बधन करमाली ने बताया कि इस भयानक सड़क हादसे में कुल आठ लोगों की जान गई है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस घटना पर दुख जताया है और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, “कल देर रात रामगढ़-बोकारो मार्ग पर लारी-बारलोंग के पास सड़क हादसे में सात लोगों की मौत की दुखद खबर से मैं बहुत दुखी हूँ। मारंग बुरु दिवंगत आत्माओं को शांति दें और पीड़ित परिवारों को दुख की इस घड़ी को सहने की शक्ति दें।” AJSU के ज़िला अध्यक्ष दिलीप डांगी ने कहा कि वह पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं और उनकी सभी मांगों का समर्थन करेंगे। ज़िला प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन को अब तक परिवार के सदस्यों के साथ संवैधानिक और संवेदनशील तरीक़े से बातचीत करनी चाहिए थी और नियमों के अनुसार मुआवज़े का भरोसा दिलाना या उसका भुगतान करना चाहिए था, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हुआ है।





