जिले में अब ऑटो-रिक्शा (Auto-rickshaw) चालकों की पहचान उनकी यूनिफॉर्म से होगी। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए, ट्रैफिक विभाग ने पुलिस अधीक्षक के निर्देशों पर सभी ऑटो-रिक्शा (Auto-rickshaw) चालक संघों के साथ एक अहम बैठक की। बैठक के दौरान, ट्रैफिक DSP अजय प्रसाद ने साफ कहा कि ऑटो को कहीं भी खड़ा करने, सवारी के लिए धक्का-मुक्की करने और ट्रैफिक नियमों को न मानने जैसी हरकतें अब बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। DSP ने सभी संघों को अपने-अपने इलाकों में चलने वाले ऑटो-रिक्शा (Auto-rickshaw) चालकों की लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया।

इसके बाद, विभाग चालकों की आसानी से पहचान के लिए इलाके के हिसाब से यूनिफॉर्म उपलब्ध कराएगा। DSP ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हर ऑटो-रिक्शा चालक के पास वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस होना ज़रूरी है; जिनके पास लाइसेंस नहीं है, उन्हें तुरंत इसके लिए अप्लाई करना होगा। बैठक के दौरान ऑटो-रिक्शा चालकों ने भी अपनी परेशानियां बताईं। उन्होंने बताया कि परमिट और फिटनेस से जुड़े कामों के लिए उन्हें रांची जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। उन्होंने परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट से जुड़े जुर्माने के लिए ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम लागू करने की भी मांग की।
इसके जवाब में, DSP ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सबसे पहले सभी ऑटो-रिक्शा चालक संघों की लिस्ट तैयार की जाएगी और फिर उनकी समस्याओं को सुनने और हल करने के लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मकसद सिर्फ़ सज़ा देना नहीं, बल्कि सिस्टम को बेहतर बनाना और आम जनता को सुरक्षित व बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधाएँ देना है।
बैठक के दौरान ऑटो-रिक्शा चालकों ने भी अपनी चिंताएं ज़ाहिर कीं। उन्होंने बताया कि परमिट और फिटनेस से जुड़ी औपचारिकताओं के लिए उन्हें रांची जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। उन्होंने परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेशन से जुड़े जुर्माने के लिए ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम लागू करने की भी मांग की। इसके जवाब में, DSP ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सबसे पहले सभी ऑटो-रिक्शा चालक संघों की एक सूची तैयार की जाएगी और उसके बाद उनकी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मकसद सिर्फ़ सज़ा देना नहीं, बल्कि सिस्टम को बेहतर बनाना और आम जनता को सुरक्षित व बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।





