झारखंड सरकार की कैबिनेट से रिम्स-2 के निर्माण (Construction) को लेकर एक बार फिर से ग्रहण लगता दिखाई पड़ रहा है, दरअसल अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य आशा लकड़ा ने जो बयान दिया है उससे साफ है कि कांके नगड़ी इलाके में बननेवाले (Construction) रिम्स -2 की तैयारी ठंढे बस्ते में जा सकती है।रिम्स-2 के निर्माण (Construction) को लेकर अब अनुसूचित जनजाति आयोग की तरफ से रोक लगाने की बात कही गई है, आयोग की सदस्य आशा लकड़ा ने साफ कहा है कि रिम्स-2 के लिए जो जमीन आवंटित की जा रही है, उसका अधिग्रहण और रैयतों के मुआवजे की रिपोर्ट मांगी है। जब तक रिपोर्ट नहीं मिल जाता है, तब तक इसपर आगे कदम नहीं बढ़ाया जा सकता है, आशा लकड़ा ने इस बात का भी जिक्र किया है कि रांची में पहले से रिम्स है इसलिए अब नए रिम्स का निर्माण दूसरे शहरों में किया जाना चाहिए।

इधर रिम्स-2 की कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने खुशी जताई थी, उन्होंने कहा है कि रिम्स-2 की सरकार की तरफ से नगड़ी में मंजूरी जनता की जीत है.,इधर सरकार की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने आशा लकड़ा के बयान पर कड़ी टिपप्णी की है। इधर बीजेपी ने के नेताओं ने साफ कहा है कि इस जमीन पर रिम्स -2 के निर्माण का जनता ने विरोध किया था।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने भी इलाके के लोगों को कहा था कि जमीन जोतो बीजेपी का कहना है कि राज्य में कई इलाकों में बड़ा जमीन खाली है. ऐसे में खेती की जमीन पर रिम्स -2 के निर्माण का कोइ औचित्य नहीं है
हालांकि रिम्स -2 के निर्माण को लेकर लगातार विरोध के बीच सरकार ने नगड़ी के इलाके में भी इसके निर्माण की तैयारी की है, लेकिन अनुसूचित जनजाति के हस्ताक्षेप के बाद एक बार फिर यह मामला गंभीर हो रहा है। ऐसे में देखना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए यह मुद्दा कहीं राजनीतिक मुद्दा ना बनकर रह जाए।
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