राजधानी रांची में 16 जुलाई (July) को होने वाली भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथ यात्रा के लिए आठ पहियों वाला भव्य रथ तैयार किया जा रहा है। देव स्नान यानी महा स्नान की धार्मिक विधि पूरी होने के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के एकांतवास में हैं। 15 जुलाई (July) को नेत्रदान की परंपरा के बाद भगवान श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे और 16 जुलाई (July) को भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी।

रांची के जगन्नाथपुर में रथ यात्रा की परंपरा सदियों पुरानी है। वर्ष 1691 में बड़कागढ़ रियासत के राजा ठाकुर एनीनाथ शाहदेव ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर जगन्नाथपुर मंदिर का निर्माण करवाया था। तभी से यहां रथ यात्रा और भव्य रथ मेले के आयोजन की परंपरा चली आ रही है।
रथ यात्रा के दिन महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर से करीब 500 मीटर दूर स्थित मौसीबाड़ी पहुंचते हैं, जहां वे अगले कुछ दिनों तक प्रवास करते हैं।
इस दौरान भव्य रथ मेले का भी आयोजन किया जाता है। मेले की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें शामिल होने के लिए झारखंड के साथ-साथ देश के कई अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रांची पहुंचते हैं।
जूना अखाड़े के मौजूदा इंटरनेशनल वाइस-प्रेसिडेंट महंत विद्यानंद सरस्वती की देखरेख में, यह परंपरा और भी भव्य रूप ले चुकी है। रथों की रंग-रोगन और मरम्मत का काम आखिरी दौर में है; श्री साधु बंध मठिया दशनामी नागा संन्यासी आश्रम में ये काम तेज़ी से चल रहे हैं। भक्तों के स्वागत और धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन के लिए भी बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं।
पिछले सालों की तरह, इस बार भी रथ खींचने में हज़ारों भक्तों के शामिल होने की उम्मीद है। आश्रम के महंत इंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि रथ यात्रा की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 14 जुलाई को ‘नव-यौवन दर्शन’ और विशेष पूजा-अर्चना होगी, जबकि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई को निकाली जाएगी। उन्होंने भक्तों से बड़ी संख्या में शामिल होने और भगवान का आशीर्वाद लेने की अपील की।
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