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नक्सल विरोधी (anti-Naxal) अभियान के तहत पुलिस को मिली बड़ी सफलता, 180 जिंदा कारतूस, एक 7.65 एमएम ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद

On: July 14, 2026 2:50 PM
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नक्सल विरोधी (anti-Naxal) अभियान के तहत पुलिस को मिली बड़ी सफलता, 180 जिंदा कारतूस, एक 7.65 एमएम ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद
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लातेहार पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए झारखंड सरकार और एनआईए द्वारा कुल 20 लाख रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमिटी सदस्य रविन्द्र गंझू उर्फ मुकेश गंझू उर्फ सुरेन्द्र गंझू को गिरफ्तार कर लिया है। इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को दी। एसपी ने बताया कि पुलिस को लगातार सूचना मिल रही थी कि रविन्द्र गंझू अपने दस्ते के साथ बेतर ओपी क्षेत्र के हेसला बांझी टोला, रंगुनिया और कुडु इलाके में सक्रिय है।

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सूचना के आधार पर 12 जुलाई 2026 को लातेहार पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा-209 बटालियन के संयुक्त विशेष अभियान दल का गठन कर सघन छापेमारी की गई। अभियान के दौरान बांझी टोला के समीप जंगल से रविन्द्र गंझू को गिरफ्तार कर लिया गया।सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. रविंद्र गंझू प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन का रीजनल कमांडर था।  झारखंड सरकार ने उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी उस पर 5 लाख रुपये का इनाम रखा था।

छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों ने एके-56 रायफल, उसकी दो मैगजीन, 180 जिंदा कारतूस, एक 7.65 एमएम ऑटोमैटिक पिस्टल, दो मैगजीन, 12 कारतूस, एक सिंगल बैरल देशी रायफल, 5.56 एमएम के 21 कारतूस, .303 के 16 कारतूस तथा अन्य सामान बरामद किए। पुलिस के अनुसार रविन्द्र गंझू (43) पिछले करीब 30 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और वर्तमान में चंदवा, गुमला तथा लोहरदगा क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों का संचालन कर रहा था।

उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में 154 आपराधिक मामले दर्ज हैं पुलिस का कहना है कि वह कई नक्सली मुठभेड़ों में शामिल रहा है तथा लेवी वसूली, विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने, आम लोगों और सुरक्षा बलों पर हमले जैसी अनेक घटनाओं में उसकी संलिप्तता रही है।रविंद्र गंझू का नाम 22 नवंबर 2019 को लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र के लुकुइया मोड़ के पास पुलिस दल पर हुए नक्सली हमले में सामने आया था. उसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चंदवा में जनसभा आयोजित थी. सुरक्षा व्यवस्था के तहत तैनात पुलिसकर्मियों पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया था। इस हमले में चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

जांच में रविंद्र गंझू को इस हमले का मुख्य आरोपी बनाया गया था। पुलिस जांच के अनुसार, इस वारदात में रविंद्र गंझू के साथ सुनील गंझू, फगुना गंझू और बैजनाथ गंझू समेत कई अन्य माओवादी भी शामिल थे. फगुना गंझू झाड़ियों में छिपकर पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख रहा था, जबकि सुनील गंझू बाइक से हमलावर दस्ते के दो शूटरों को बीरजांगा जंगल से घटनास्थल तक लेकर आया था. सफल हमले और पुलिस के हथियार लूटने के बाद रविंद्र गंझू ने अपने सहयोगियों को बोदा तालाब के पास पांच-पांच हजार रुपये का इनाम भी बांटा था।

गिरफ्तारी के बाद लातेहार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां रविंद्र गंझू से गहन पूछताछ कर रही हैं, अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान संगठन के सक्रिय नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों और विस्फोटकों के भंडारण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है. पुलिस इन सूचनाओं के आधार पर कई स्थानों पर छापेमारी की तैयारी कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी से पलामू और रांची प्रमंडल में सक्रिय माओवादी संगठन की नेतृत्व क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

पिछले कुछ वर्षों में लगातार चलाए जा रहे अभियान के कारण संगठन पहले ही कमजोर पड़ा है. ऐसे में एक रीजनल कमांडर की गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि झारखंड में नक्सल गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।

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