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नवजात(newborn)की मौत के बाद अस्पताल परिसर में हंगामा, अस्पताल परिसर में पुलिस बल की तैनाती

On: July 16, 2026 5:57 PM
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नवजात(newborn)की मौत के बाद अस्पताल परिसर में हंगामा, अस्पताल परिसर में पुलिस बल की तैनाती
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जामताड़ा सदर अस्पताल में गुरुवार सुबह एक प्रसूता और उसके नवजात (newborn) की मौत के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हो गया। आक्रोशित परिजनों ने प्रसूता और नवजात (newborn) की  इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, मुख्य गेट जाम कर दिया तथा दोषी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई।प्रसूता और नवजात (newborn) की मौत के बाद परिजन में शोक का महौल है ।

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मृतका की पहचान जामताड़ा नगर के सरकारबांध निवासी करीब 30 वर्षीय रीना कुमारी (रीना देवी) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब छह बजे प्रसव पीड़ा होने पर उन्होंने सबसे पहले 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण ई-रिक्शा से रीना को सदर अस्पताल लाया गया।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक तत्काल उपलब्ध नहीं थे और केवल नर्सिंग स्टाफ एवं सहिया द्वारा इलाज किया जा रहा था। उनका कहना है कि अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने सलाइन, इंजेक्शन तथा अन्य दवाइयां बाहर से खरीदकर लाने को कहा। साथ ही अस्पताल के बाहर स्थित एक निजी मेडिकल स्टोर से दवा लेने और बार-बार जामताड़ा के एक निजी अस्पताल (आशा हॉस्पिटल) ले जाने की सलाह भी दी गई।

परिजनों का आरोप है कि प्रसूता की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय पर समुचित इलाज नहीं मिला। बाद में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. स्वीटी कुमारी ने खून की कमी का हवाला देते हुए महिला को पीएमसीएच रेफर कर दिया। परिजनों का दावा है कि अस्पताल परिसर से बाहर निकलते ही रीना और उसके नवजात की मौत हो गई। उनका यह भी आरोप है कि जच्चा और बच्चा की मौत के बाद रेफर करने की औपचारिकता पूरी की गई।

घटना के बाद आक्रोशित परिजन शव लेकर दोबारा सदर अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की भी सूचना है। परिजनों ने अस्पताल के मुख्य गेट को जाम कर दिया और दोषी डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि यदि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले के सदर अस्पताल की यह स्थिति है, तो अन्य जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। माहौल तनावपूर्ण होने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई।

हालांकि, इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन, संबंधित चिकित्सक अथवा स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप उनके दावे हैं। प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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