गोपीकांदर प्रखंड में खरीफ सीजन के बीच खाद का गंभीर संकट किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। एक ओर सरकारी लैम्पस यानी Large Adivasi Multipurpose Cooperative Society में खाद उपलब्ध होने की बात कही जा रही है जबकि सच्चाई ये है कि वहां से किसानों को वहां से खाद नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में किसान निजी दुकानों से अधिक कीमत चुकाकर डीएपी और यूरिया खरीदने को विवश हैं। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ-साथ फसल उत्पादन पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समय है, लेकिन लैम्पस कार्यालय का चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल रही है। कई किसान रोजाना उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ता है। समय पर खाद नहीं मिलने से खेतों में उर्वरक का छिड़काव प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।
स्थानीय किसानों के अनुसार वे गोपीकांदर के बजाय खरौनी और दुर्गापुर बाजार से खाद खरीदने को मजबूर हैं। निजी बाजार में डीएपी 2,000 से 2,300 रुपये प्रति बोरी तक बेची जा रही है, जबकि यूरिया 300 से 400 रुपये प्रति बोरी के बीच मिल रही है। किसानों का आरोप है कि सरकारी दर की तुलना में उन्हें काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रखंड प्रशासन ने अब तक इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की है। उनका कहना है कि यदि समय पर सरकारी दर पर खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो खरीफ फसल पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकारी लैम्पस से किसानों को खाद नहीं मिल रही है, तो वही खाद निजी बाजारों में आसानी से कैसे उपलब्ध हो रही है। किसानों का आरोप है कि गोपीकांदर प्रखंड के दुर्गापुर और खरौनी बाजार में बड़े पैमाने पर खाद की अवैध बिक्री की जा रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा किसानों को सरकारी दर पर तत्काल खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ मौसम में धान की फसल के लिए समय पर उर्वरक का उपयोग अत्यंत आवश्यक होता है। ऐसे में खाद की कृत्रिम कमी और कालाबाजारी किसानों की आय और उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लैम्पस के माध्यम से पारदर्शी तरीके से खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाए और कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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