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Anita Seva Sadan Hospital में प्रसूता के मौत पर बवाल, इलाज के दौरान हुई महिला की मौत

On: July 29, 2026 12:09 PM
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Anita Seva Sadan Hospital में प्रसूता के मौत पर बवाल, इलाज के दौरान हुई महिला की मौत
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लोहरदगा रोड दुनदुरिया स्थिति अनीता सेवा सदन अस्पताल  (Anita Seva Sadan Hospital) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। इस बार मामला एक Anita Seva Sadan Hospital  में प्रसूता महिला के इलाज के दौरान कथित लापरवाही का है, जिसने मरीज के परिजनों को पूरी रात गुमला से रांची तक खून की व्यवस्था के लिए भटकने पर मजबूर कर दिया। आरोप है कि Anita Seva Sadan Hospital द्वारा मरीज का ब्लड ग्रुप गलत दर्ज किए जाने के कारण समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो सका और मरीज की जान पर गंभीर खतरा मंडराने लगा।

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जानकारी के अनुसार, सोमवार को लगभग 3 बजे प्रसव के लिए गुमला के अनीता सेवा सदन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक ऑपरेशन से पहले अस्पताल में मरीज की जांच की गई, जिसमें हीमोग्लोबिन लगभग 7 ग्राम/डीएल बताया गया। डॉक्टरों ने कहा कि मरीज के शरीर में खून की मात्रा काफी कम है और ऑपरेशन के दौरान या उसके बाद रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर है और उसका हीमोग्लोबिन घटकर लगभग 4 ग्राम/डीएल रह गया है। डॉक्टरों ने तत्काल ब्लड की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इसी दौरान अस्पताल द्वारा मरीज का ब्लड ग्रुप A पॉजिटिव (A+) बताया गया और उसी आधार पर ब्लड सैंपल तथा आवश्यक दस्तावेज परिजनों को सौंप दिए गए।

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन देर रात निजी वाहन से रांची के लिए रवाना हुए। काफी प्रयास के बाद वे बरियातू स्थित हेल्थ पॉइंट हॉस्पिटल के ब्लड बैंक पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि रक्त जारी करने के लिए पहले एक रिप्लेसमेंट डोनर की आवश्यकता होगी। इसके बाद परिजनों ने लालपुर निवासी आभास किंडो से संपर्क किया। आभास किंडो रात करीब 12 बजे ब्लड बैंक पहुंचे और रक्तदान किया।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। परिजनों के अनुसार, ब्लड बैंक में जब अनीता सेवा सदन से भेजे गए मरीज के ब्लड सैंपल की दोबारा जांच की गई तो मरीज का ब्लड ग्रुप B पॉजिटिव (B+) पाया गया, जबकि अस्पताल द्वारा जारी दस्तावेजों में A पॉजिटिव (A+) दर्ज था। ब्लड ग्रुप में इस गंभीर विसंगति के कारण ब्लड बैंक ने रक्त जारी करने से इनकार कर दिया और स्पष्ट कहा कि जब तक गुमला अस्पताल से मरीज का नया एवं सही ब्लड सैंपल नहीं भेजा जाएगा, तब तक ब्लड उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।

इस कथित गलती के कारण परिजनों को पूरी रात गुमला और रांची के बीच भागदौड़ करनी पड़ी। बड़ी मुश्किल से रक्तदाता की व्यवस्था होने के बावजूद मरीज को समय पर रक्त नहीं मिल सका। परिजनों का कहना है कि यदि ब्लड बैंक दोबारा जांच नहीं करता और गलत ब्लड चढ़ा दिया जाता या समय पर सही ब्लड नहीं मिल पाता, तो मरीज की जान भी जा सकती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई अनहोनी हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने इस पूरे मामले में अस्पताल के डॉक्टर से फोन पर संपर्क किया तो डॉक्टर ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि “मिस्टेक हो गया था। दोबारा जांच करने पर मरीज का ब्लड ग्रुप B+ पाया गया है।”

इस पूरे मामले को लेकर जब अनीता सेवा सदन अस्पताल के डॉ. राजकुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने कथित तौर पर ब्लड ग्रुप की जांच में हुई गलती स्वीकार की। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि आखिर इतनी गंभीर लापरवाही किस स्वास्थ्यकर्मी ने की, जिसने मरीज का ब्लड ग्रुप गलत दर्ज किया, तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि जांच किस स्वास्थ्यकर्मी ने की थी। जब उनसे जांच रिपोर्ट पर मौजूद हस्ताक्षर के बारे में पूछा गया कि आखिर यह सिग्नेचर किसका है, तब भी डॉ. राजकुमार कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। वे यह तक नहीं बता पाए कि रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किस कर्मचारी के हैं और जांच करने वाला व्यक्ति कौन था।

अस्पताल के अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से इस संबंध में पूछताछ की गई तो किसी ने भी इस कथित गलती की जिम्मेदारी नहीं ली। परिजनों और मौजूद लोगों के अनुसार, अस्पताल के कर्मचारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए, लेकिन किसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर गलत ब्लड ग्रुप की रिपोर्ट किसने तैयार की और उसे मरीज के परिजनों को कैसे सौंप दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की जांच प्रक्रिया, मरीजों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर अस्पताल में मरीज का ब्लड ग्रुप A+ बताया गया, जबकि दूसरी ओर ब्लड बैंक की जांच में वही B+ निकला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि ब्लड बैंक में दोबारा जांच नहीं होती तो इसके क्या परिणाम हो सकते थे।

परिजनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, दोषी डॉक्टरों और संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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