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अटल की पुण्यतिथि पर झारखंड से जुड़ा उनका रिश्ता चर्चा में, कैसे वाजपेयी सरकार में साकार हुआ अलग राज्य का सपना

On: August 16, 2026 1:16 PM
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अटल की पुण्यतिथि पर झारखंड से जुड़ा उनका रिश्ता चर्चा में, कैसे वाजपेयी सरकार में साकार हुआ अलग राज्य का सपना
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पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार, 16 अगस्त 2026 को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उनके राष्ट्र निर्माण, सुशासन और सार्वजनिक जीवन में योगदान को नमन किया। वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में हुआ था। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से पूर्व में भी उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके राष्ट्रसेवा और विकास के प्रति समर्पण को याद किया गया है।

अटल बिहारी वाजपेयी का झारखंड से रिश्ता भी उनकी राजनीतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। झारखंड का गठन लंबे समय तक चले जनआंदोलन और अलग राज्य की मांग का परिणाम था लेकिन वर्ष 2000 में इसे संवैधानिक रूप से राज्य का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में पूरी हुई। झारखंड सरकार के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, बिहार पुनर्गठन अधिनियम के तहत 15 नवंबर 2000 को झारखंड देश का 28वां राज्य बना।

दशकों पुराना था अलग झारखंड का आंदोलन

अलग झारखंड राज्य की मांग कोई नई राजनीतिक मांग नहीं थी। आदिवासी पहचान, प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार, क्षेत्रीय विकास और राजनीतिक स्वायत्तता जैसे मुद्दों को लेकर लंबे समय तक आंदोलन चलता रहा। इस आंदोलन में अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक संगठनों तथा नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर भूमिका निभाई।

इसलिए झारखंड का गठन किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल के प्रयास का परिणाम नहीं माना जा सकता। इसके पीछे वर्षों का जनसंघर्ष और क्षेत्रीय आकांक्षाएं थीं। हालांकि, वर्ष 2000 में इस मांग को संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के जरिए राज्य का स्वरूप देने में केंद्र की तत्कालीन वाजपेयी सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अटल सरकार में आगे बढ़ी राज्य गठन की प्रक्रिया

केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद बिहार के पुनर्गठन की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंची। बिहार पुनर्गठन विधेयक, 2000 इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव था। संसद से विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बिहार के दक्षिणी हिस्से से अलग झारखंड राज्य के गठन का रास्ता साफ हुआ।

झारखंड सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 का उल्लेख है। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत 15 नवंबर 2000 को झारखंड अस्तित्व में आया।

15 नवंबर को क्यों बना झारखंड?

15 नवंबर का दिन झारखंड के इतिहास में बेहद खास है। इसी दिन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती भी होती है। झारखंड का गठन इसी ऐतिहासिक तारीख को किया गया और रांची को राज्य की राजधानी बनाया गया। आधिकारिक राज्य पोर्टल के अनुसार, झारखंड का निर्माण बिहार के तत्कालीन दक्षिणी हिस्से से हुआ था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मौकों पर झारखंड के गठन में अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका का उल्लेख कर चुके हैं। 2021 में झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण झारखंड अस्तित्व में आया और उन्होंने आदिवासी हितों को सरकार की नीतियों से जोड़ने के लिए अलग जनजातीय मंत्रालय के गठन की पहल भी की थी।

अटल की राजनीति में ‘राष्ट्र प्रथम’ की सोच

अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक जीवन करीब छह दशक तक फैला रहा। सांसद, विदेश मंत्री, नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके समर्थक और राजनीतिक सहयोगी उन्हें एक ऐसे नेता के तौर पर याद करते हैं, जिनके लिए दलगत राजनीति से ऊपर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए अटल बिहारी वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन को याद किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी का सार्वजनिक जीवन लंबे समय तक निर्विवाद रहा और उन्होंने विभिन्न राजनीतिक जिम्मेदारियों के बावजूद राष्ट्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

सुशासन और जनकल्याण को लेकर अटल की सोच को आज भी उनकी राजनीतिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाजपेयी को याद करते हुए उनके नेतृत्व, दूरदृष्टि और राष्ट्रसेवा को प्रेरणादायी बताया है।

पुण्यतिथि पर फिर याद आया झारखंड से अटल का रिश्ता

16 अगस्त 2026 को अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर जब देश उनके व्यक्तित्व और योगदान को याद कर रहा है, तब झारखंड में उनके साथ जुड़ी राज्य गठन की कहानी भी एक बार फिर चर्चा में है। अलग झारखंड का सपना दशकों के आंदोलन से निकला था, लेकिन 2000 में उसे संवैधानिक रूप से साकार करने की प्रक्रिया अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में पूरी हुई।

यही वजह है कि झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम केवल पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि राज्य गठन की निर्णायक प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में भी याद किया जाता है।

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