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JSSC-CGL रद्द होने के बाद भी थमा नहीं छात्रों का संघर्ष, CBI जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग पर अड़े अभ्यर्थी

On: August 18, 2026 1:25 PM
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JSSC-CGL रद्द होने के बाद भी थमा नहीं छात्रों का संघर्ष, CBI जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग पर अड़े अभ्यर्थी
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झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया। सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा के साथ TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं, उनके परिणामों और संबंधित चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया। साथ ही वर्ष 2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों की जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाने की बात कही गई है।

सरकार के इस फैसले को आंदोलनरत छात्रों की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे अभ्यर्थियों में घोषणा के बाद खुशी की लहर दौड़ गई। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में मौजूद छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, गुलाल लगाया और जश्न मनाया। इसके बाद छात्रों ने धरनास्थल से अल्बर्ट एक्का चौक तक यात्रा भी निकाली।

लेकिन परीक्षा रद्द होने के बावजूद छात्रों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आंदोलनकारी छात्र अब यह चाहते हैं कि केवल परीक्षा रद्द करने तक मामला सीमित न रहे, बल्कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और प्रभावी जांच हो तथा ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए जिसमें भविष्य में पेपर लीक, धांधली या भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा रद्द होना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार के लिए संघर्ष की दिशा आगे भी जारी रहेगी।

इसी आंदोलन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्होंने अपना अनशन जारी रखा। सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद उनके अनशन को समाप्त कराया गया। मंगलवार को मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उन्हें जूस पिलाया और अनशन खत्म कराया।

वहीं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का अनशन खत्म कराने के दौरान जयराम महतो की मौजूदगी भी चर्चा में रही। सरकार के फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े नेताओं और छात्रों ने इसे लंबे संघर्ष का परिणाम बताया। आंदोलन के दौरान छात्रों के समर्थन में जयराम महतो भी खुलकर सामने आए थे।

सरकार के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मामला सिर्फ JSSC-CGL तक सीमित नहीं रखा गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में वर्ष 2014 से अब तक हुई संभावित गड़बड़ियों की व्यापक जांच की बात कही है। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित करने का फैसला भी किया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है जिसमें प्रश्नपत्र की सुरक्षा से लेकर परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और परिणाम जारी होने तक पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो।

हालांकि, छात्रों की एक प्रमुख मांग कथित अनियमितताओं की CBI जांच भी रही है। सरकार की ओर से फिलहाल JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने तथा व्यापक जांच की घोषणा तो की गई है, लेकिन CBI जांच की मांग पर स्पष्ट फैसला सामने नहीं आया है। यही वजह है कि छात्रों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि जांच कितनी स्वतंत्र और प्रभावी होगी और दोषियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। JSSC-CGL के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों के एक वर्ग ने परीक्षा रद्द किए जाने का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी की है और अब परीक्षा रद्द होने से उनकी नौकरी और भविष्य प्रभावित होगा। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर पहले से चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करना भी जरूरी होगा।

फिलहाल इतना साफ है कि 25 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन ने झारखंड की भर्ती परीक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। JSSC-CGL को रद्द करने का फैसला आंदोलनकारियों के लिए बड़ी जीत जरूर है, लेकिन असली परीक्षा अब सरकार की है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है, दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और नई भर्ती व्यवस्था छात्रों के भरोसे पर कितनी खरी उतरती है।

छात्रों का संदेश भी स्पष्ट है उन्हें सिर्फ परीक्षा रद्द नहीं चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें मेहनत से परीक्षा देने वाले हर अभ्यर्थी को यह भरोसा हो कि उसका भविष्य किसी धांधली, पेपर लीक या सिस्टम की कमजोरी का शिकार नहीं होगा। इसी भरोसे की लड़ाई अब झारखंड के छात्र आंदोलन का अगला अध्याय बन सकती है।

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