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JMM कार्यकर्तायों (JMM workers) का मारपीट और बदसलूकी का विडियो वायरल, राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर उठा सवाल

JMM कार्यकर्तायों (JMM workers) का मारपीट और बदसलूकी का विडियो वायरल, राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर उठा सवाल
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गिरिडीह जिले में  JMM कार्यकर्तायों (JMM workers)  का मारपीट और बदसलूकी का विडियो का एक वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें कथित तौर पर छात्रों के साथ मारपीट और बदसलूकी (गाली-गलौज) करते हुए दिखाया गया है। JMM कार्यकर्तायों (JMM workers)  का  वायरल वीडियो में एक व्यक्ति छात्र को गाली देते हुए और यह पूछते हुए सुनाई देता है,अबुआ आदिवासी (हमारे आदिवासी) कहां गए?इस वीडियो के सामने आने से घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं। JMM कार्यकर्तायों (JMM workers) का वायरल वीडियो को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि गाली-गलौज करने वाला व्यक्ति JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) से जुड़ा एक कार्यकर्ता है। हालांकि, वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान या उसकी राजनीतिक संबद्धता के बारे में अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरिडीह में छात्रों के बीच हुई एक बहस मारपीट और कथित गाली-गलौज की घटना में बदल गई। इस दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो में एक व्यक्ति छात्र से सवाल करते हुए दिखता है।

वीडियो ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि असहमति या विरोध जताने पर छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

घटना के बाद अबुआ आदिवासी’(हमारे आदिवासी) नारे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या आदिवासी समुदाय के अधिकारों, सम्मान और पहचान की वकालत करने वाली राजनीतिक चर्चा में आदिवासी छात्रों के साथ कथित गाली-गलौज और मारपीट की कोई जगह है?

आलोचकों का तर्क है कि राजनीतिक विचारधारा या संगठनात्मक जुड़ाव चाहे जो भी हो, छात्रों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। वहीं, संबंधित पक्षों से आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।

वायरल वीडियो के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि घटना को लेकर पुलिस में कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं।

घटना के वीडियो ने छात्रों की सुरक्षा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं के आचरण और गिरिडीह में आदिवासी युवाओं की गरिमा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और संबंधित संगठन पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है।

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