लोहरदगा नगर परिषद के अध्यक्ष और बीजेपी नेता अनिल उरांव ने लोहरदगा शहर के होटल नॉवेल्टी में ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ (Tribal Unity Grand Gathering) पर को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में होने वाली ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ (Tribal Unity Grand Gathering) पर सवाल उठाए। यह आदिवासी एकता महाजुटान’ (Tribal Unity Grand Gathering) कार्यक्रम संयुक्त आदिवासी संगठनों और आदिवासी नेता (और पूर्व मंत्री) बंधु तिर्की के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के नाम पर हो रही इसआदिवासी एकता महाजुटान’ (Tribal Unity Grand Gathering) रैली के पीछे ईसाई धर्म मानने वाले लोग हैं और इस कार्यक्रम का मकसद खास तौर पर परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) का विरोध करना है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी नेताओं ने परिसीमन विधेयक का समर्थन किया और इसे आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए बहुत ज़रूरी बताया। अनिल उरांव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए परिसीमन विधेयक को लेकर ईसाई धर्म मानने वालों में चिंता है।उनके अनुसार, उन्हें डर है कि अगर यह विधेयक लागू होता है, तो पारंपरिक और रूढ़िवादी सरना धर्म को मानने वाले आदिवासियों का राजनीतिक प्रभाव और प्रतिनिधित्व विधानसभा और लोकसभा दोनों में बढ़ सकता है।
इस बदलाव से मौजूदा राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले कुछ लोग सरना आदिवासियों के लिए बने अधिकारों का गलत फायदा उठाकर आदिवासी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। उरांव ने दावा किया कि ईसाई समुदाय के बहुत से लोगों ने आदिवासी आरक्षण कोटे के ज़रिए झारखंड में सरकारी नौकरियां हासिल की हैं और आदिवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों पर चुनाव जीते हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन विधेयक लागू होने से सरना आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों के प्रति और जागरूक होगा और उनकी राजनीतिक भागीदारी मज़बूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों को कमज़ोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विषय रखते हुए रामचंद्र गिरी ने कहा कि आज़ादी के बाद से ही यह संसदीय प्रक्रिया रही है कि केंद्र सरकारें राष्ट्रीय हित में विधेयक लाती हैं, संसद में उन पर बहस करती हैं, बहुमत से पास करती हैं और लागू करती हैं। उन्होंने माना कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी विधेयक का समर्थन या विरोध करना राजनीतिक दलों और संगठनों का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने झारखंड में एक खास धर्म के बिशप की कथित कार्रवाई की निंदा की, जिन्होंने कथित तौर पर पादरियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया था कि वे लोगों को सड़कों पर उतरने और परिसीमन विधेयक के खिलाफ 30 अगस्त की रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए लामबंद करें।
आदिवासी नेता पवन टिग्गा ने कहा कि सरना आदिवासी समुदाय अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आदिवासी समुदाय के ख़िलाफ़ किसी भी कथित साज़िश को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने समुदाय के सदस्यों से अपने अधिकारों को लेकर सतर्क और एकजुट रहने का आग्रह किया। परिसीमन विधेयक का समर्थन करते हुए महिला नेताओं सरिता देवी और कलावती देवी ने कहा कि यह विधेयक आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधित्व को बढ़ाएगा और महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर सम्मान और भागीदारी के अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि परिसीमन विधेयक देश, राज्य और आदिवासी समुदाय के हित में है और इस कदम का स्वागत किया।
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