गढ़वा जिले के रंका प्रखंड में मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेजों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने निर्वाचन प्रक्रिया में कथित अनधिकृत हस्तक्षेप और गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर के कल्याणपुर स्थित आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में झामुमो नेताओं ने दावा किया कि रंका प्रखंड क्षेत्र की एक दुकान से 269 ऐसे प्रपत्र-7 (Form-7) बरामद किए गए हैं, जो कंप्यूटर से पहले से भरे हुए थे और जिन पर संबंधित हस्ताक्षर नहीं थे। पार्टी नेताओं के अनुसार, इन फॉर्म में मतदाताओं से संबंधित विवरण पहले से दर्ज थे और इन्हें बीएलओ के पास हस्ताक्षर कराने के लिए ले जाया जा रहा था।
झामुमो नेताओं का कहना है कि गड़बड़ी की आशंका होने पर ग्रामीणों ने संबंधित व्यक्ति को पकड़कर प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस उसे थाने ले गई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
मामले को लेकर झामुमो ने यह भी आरोप लगाया कि रंका प्रखंड की खपरो पंचायत के बूथ संख्या 382 और 407 से संबंधित मतदाता सूची तथा SIR से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज एक ऐसे झोले में पाए गए, जिस पर भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी की प्रचार सामग्री लगी हुई थी। पार्टी ने सवाल उठाया कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचे।
झामुमो केंद्रीय सदस्य जवाहर पासवान ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि विशेष रूप से अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलित बहुल क्षेत्रों के पात्र मतदाताओं को निशाना बनाकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच जरूरी है।
पासवान ने यह भी सवाल उठाया कि SIR से जुड़े सरकारी दस्तावेज किसी राजनीतिक दल या उसके कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचे। उन्होंने मांग की कि जांच पूरी होने तक केवल संदिग्ध अथवा पूर्व-भरे Form-7 के आधार पर किसी भी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए।
झामुमो जिला सचिव शरीफ अंसारी ने रंका प्रखंड की खपरो पंचायत के बूथ संख्या 382 और 407 से जुड़े पूर्व-भरे Form-7 के स्रोत की जांच कराने और इन्हें तैयार कराने वाले लोगों की पहचान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन फॉर्म के आधार पर प्राप्त सभी आपत्तियों और संबंधित प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उसे विधिसम्मत सूचना दी जाए और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। झामुमो ने कहा कि यदि जांच में किसी राजनीतिक दल, पदाधिकारी या कार्यकर्ता की संलिप्तता सामने आती है तो निर्वाचन कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रेस वार्ता में झामुमो के केंद्रीय सदस्य तनवीर आलम, केंद्रीय सदस्य मनोज ठाकुर, जिला कोषाध्यक्ष चंदन जायसवाल, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रवण सिंह छोटू, जिला उपाध्यक्ष लल्लू राम, उपाध्यक्ष संजय काश्यकर, जिला कार्यकारिणी सदस्य धनंजय तिवारी, युवा मोर्चा प्रवक्ता सुजीत चंद्रवंशी, रशीद अंसारी, सुमित कुमार पाल, सनी चंद्रवंशी, रंथा नायक, प्रियम सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
मतदाता सूची से जुड़े इस मामले ने रंका प्रखंड में राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। अब पूरे घटनाक्रम में प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की जांच तथा आधिकारिक रिपोर्ट पर नजर रहेगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद दस्तावेजों की वास्तविक प्रकृति क्या थी और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
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