रामगढ़ में एक टोटो चालक ने ईमानदारी और इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है। सड़क पर मिले 35 हजार रुपये से भरे बटुए को चालक ने अपने पास रखने के बजाय उसके असली मालिक तक पहुंचाकर मानवता का परिचय दिया।
मंगलवार को पतरातू के गेगदा निवासी प्रदीप गोप बैंक से 35 हजार रुपये निकालकर पैदल अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उनकी रकम सड़क पर गिर गई। काफी देर बाद जब उन्हें रुपये गिरने की जानकारी हुई तो उन्होंने इसकी सूचना रामगढ़ थाना पुलिस को दी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद रामगढ़ थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडे के निर्देश पर एसआई पंकज किशोर सिंह ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में दिखाई दिया कि रुपये गिरने के कई घंटे बाद वहां से गुजर रहे एक टोटो चालक की नजर सड़क पर पड़े पैसों पर पड़ी और उसने रुपये उठा लिए।
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने टोटो चालक की पहचान और तलाश शुरू की। थाना प्रभारी ने फुटेज रामगढ़ टैक्सी मेंस यूनियन के अध्यक्ष अमित सिन्हा के साथ साझा किया। इसके बाद यूनियन के सदस्यों और अन्य वाहन चालकों ने मिलकर उक्त टोटो चालक की तलाश शुरू की।
इसी दौरान टोटो चालक एजेंट आदिल के साथ रामगढ़ टैक्सी मेंस यूनियन के कार्यालय पहुंचा। चालक ने बताया कि उसे सड़क पर 35 हजार रुपये मिले थे और वह रकम उसके असली मालिक को लौटाने के लिए यूनियन कार्यालय आया है।
टोटो चालक की ईमानदारी की जानकारी मिलने पर यूनियन अध्यक्ष अमित सिन्हा ने तत्काल रामगढ़ थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडे को इसकी सूचना दी। इसके बाद पतरातू गेगदा निवासी प्रदीप गोप भी यूनियन कार्यालय पहुंचे।
रामगढ़ विकास नगर निवासी टोटो चालक शिव भुईयां ने प्रदीप गोप को उनके पूरे 35 हजार रुपये वापस लौटा दिए। रकम वापस मिलने पर प्रदीप गोप ने राहत की सांस ली और चालक की ईमानदारी की सराहना की।
रामगढ़ टैक्सी मेंस यूनियन के अध्यक्ष अमित सिन्हा ने शिव भुईयां के इस कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया में ईमानदारी और इंसानियत से बड़ी कोई चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद किसी दूसरे की मेहनत की कमाई को सुरक्षित उसके मालिक तक पहुंचाना समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
टोटो चालक शिव भुईयां की इस ईमानदारी ने न सिर्फ 35 हजार रुपये उनके वास्तविक मालिक तक पहुंचाए, बल्कि यह संदेश भी दिया कि आज के दौर में भी इंसानियत और ईमानदारी जिंदा है।
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