सदर अस्पताल जामताड़ा में गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत के मामले से जुड़े मुकदमे में भाजपा जिला अध्यक्ष समेत आठ नामजद भाजपा कार्यकर्ताओं को न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जिले की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जमानत मिलने के बाद भाजपा केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य हरिमोहन मिश्रा ने न्यायपालिका के प्रति अपनी आस्था जताई। उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले से भाजपा कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
हरिमोहन मिश्रा ने आरोप लगाया कि अस्पताल में हुई घटना को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के इशारे पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं को न्यायालय से जमानत मिलने के बाद मंत्री की कथित साजिश कामयाब नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले में प्रदेश भाजपा नेतृत्व की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और पार्टी नेतृत्व लगातार मामले की निगरानी करता रहा। मिश्रा ने कहा कि जब तक वे राजनीति में सक्रिय हैं और उन्हें प्रदेश नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलता रहेगा, तब तक वे स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी स्तर पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से जांच की मांग करेंगे हरिमोहन मिश्रा
हरिमोहन मिश्रा ने कहा कि वे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर डॉ. इरफान अंसारी के स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद से अब तक के कार्यकाल की विस्तृत जांच कराने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि जांच के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों की वास्तविकता सामने आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता या दोष सामने आता है तो जिम्मेदारी तय करते हुए उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। मिश्रा ने कहा कि वे इस पूरे मामले को केंद्र सरकार के स्तर पर भी उठाएंगे।
स्वास्थ्य व्यवस्था और आउटसोर्सिंग को लेकर सरकार पर निशाना
भाजपा नेता ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि आउटसोर्सिंग और अनुबंध के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में कथित अनियमितताएं हो रही हैं। इसके साथ ही दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी की जांच कराने की मांग भी उन्होंने की।
हरिमोहन मिश्रा ने आरोप लगाया कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और इसका सबसे अधिक असर गरीब, दलित, आदिवासी एवं अन्य कमजोर वर्गों के लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
108 एंबुलेंस सेवा को लेकर भी उठाए सवाल
हरिमोहन मिश्रा ने 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना सेवा बंद करने की घोषणा से आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आपातकालीन एंबुलेंस सेवा बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
मिश्रा ने कहा कि सदर अस्पताल में हुई घटना समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा आगे भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी। राजनीतिक स्तर के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी इन मामलों को उठाया जाएगा।
केंद्र सरकार के स्तर पर मामला उठाने की तैयारी
हरिमोहन मिश्रा ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और विभाग में कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।
भाजपा नेताओं को जमानत मिलने के बाद जामताड़ा में यह मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। अब हरिमोहन मिश्रा की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखे जाने और जांच की मांग किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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