देवरिया के छोटे से गांव भोपतपुरा की पहचान अब अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी एक बड़ी जिम्मेदारी के कारण देशभर में चर्चा में है। गांव के रहने वाले सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया गया है।2 सितंबर 2026 को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगी। भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले मिश्रा हाल ही में पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अब उन्हें राम मंदिर की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जैसे ही यह खबर देवरिया के भोपतपुरा गांव पहुंची, वहां खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ गांव के एक व्यक्ति की बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भोपतपुरा के लिए गौरव का क्षण है।
39 साल की सैन्य सेवा के बाद राम मंदिर की जिम्मेदारी
जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में लगभग चार दशक तक सेवा की। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमान और नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभालीं। वह पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रहे और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इस कमान की जिम्मेदारी उनके पास थी। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि, प्रशासनिक अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब उनकी जिम्मेदारी मंदिर और उससे जुड़े व्यापक प्रशासनिक एवं संचालन कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की होगी।
5,585 आवेदनों के बाद हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के चयन की प्रक्रिया काफी व्यापक रही। इस पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और वैज्ञानिक सुरेश हावरे शामिल थे। आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों को कई चरणों से गुजरना पड़ा। दिल्ली-एनसीआर, पुणे और ओडिशा के संबलपुर में विशेषज्ञ टीमों ने आवेदनों का मूल्यांकन किया। इसके बाद उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया और आगे ऑनलाइन तथा आमने-सामने इंटरव्यू की प्रक्रिया हुई। अंतिम चरण में तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट के सामने रखा गया, जिसमें से जितेंद्र मिश्रा का चयन किया गया।
कई पूर्व अधिकारियों के नाम भी थे चर्चा में
CEO पद की चयन प्रक्रिया के दौरान कई सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में थे। पूर्व IPS और IAS अधिकारियों को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही थीं। अंतिम निर्णय से पहले पूर्व IPS राजेश पांडेय समेत कई नामों की चर्चा मीडिया रिपोर्टों में हुई, लेकिन ट्रस्ट की बैठक में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगी। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपनी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ट्रस्ट में तीन नए सदस्य भी शामिल
CEO की नियुक्ति के साथ ही ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की भी घोषणा की गई है। दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को ट्रस्ट में शामिल किया गया है। महेश भागचंदका को दिवंगत VHP नेता अशोक सिंघल का रिश्तेदार बताया गया है। इन नियुक्तियों के साथ ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना में भी बदलाव देखने को मिला है। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रस्ट की मौजूदा जरूरतों और प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
भोपतपुरा में घर-घर खुशी, ग्रामीणों ने कहा- गांव का नाम रोशन हुआ
जितेंद्र मिश्रा के CEO बनने की खबर के बाद भोपतपुरा में बधाई देने वालों का सिलसिला शुरू हो गया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव के बेटे ने अपनी मेहनत, अनुशासन और देशसेवा के बल पर जिस ऊंचाई को हासिल किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बड़े पदों पर पहुंचने के बावजूद जितेंद्र मिश्रा का अपने गांव से लगाव बना रहा। परिवार का गांव आना-जाना भी रहा है। ग्रामीण उन्हें सरल स्वभाव और सहज व्यवहार के लिए याद करते हैं।
परिवार में भी शिक्षा और सेवा की मजबूत परंपरा
जितेंद्र मिश्रा दो भाइयों में बड़े हैं। उनके छोटे भाई देवेंद्र मिश्रा दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं जबकि उनकी बहन वंदना मिश्रा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। परिवार की अगली पीढ़ी भी शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। जितेंद्र मिश्रा के बड़े बेटे शांतनु मिश्रा ने बीटेक की पढ़ाई पूरी की है और दिल्ली में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। छोटे बेटे शारण्य मिश्रा ने लंदन से पीएचडी की है और वहीं कार्यरत हैं।
सैन्य वर्दी से राम मंदिर की प्रशासनिक जिम्मेदारी तक
जितेंद्र मिश्रा का सफर एक छोटे से गांव से शुरू होकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष पदों तक पहुंचा और अब अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्रशासनिक जिम्मेदारी तक पहुंच गया है। एक ओर उन्होंने दशकों तक देश की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं, वहीं अब उनके सामने विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की चुनौती होगी। ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के रूप में उनकी नियुक्ति को मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पेशेवर और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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