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DUMKA: PWD सड़क-पुल निर्माण में अनियमितता के आरोप, जिला परिषद सदस्य ने किया निरीक्षण

DUMKA: PWD सड़क-पुल निर्माण में अनियमितता के आरोप, जिला परिषद सदस्य ने किया निरीक्षण
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दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड में बरमसिया-सहरजोरी-बिसनपुर-देवाडीह-रथुनातपुर-चिरूडीह-सहरघाटी PWD सड़क एवं पुल निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद जिला परिषद सदस्य प्रकाश हांसदा ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और मौके पर निर्माण कार्य की स्थिति का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए। जिला परिषद सदस्य और ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर इस्तेमाल किए जा रहे कुछ पत्थरों में कोयले जैसी काली मात्रा दिखाई दी। इसे लेकर निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की गई है।

पुल निर्माण और डायवर्सन व्यवस्था पर भी सवाल

ग्रामीणों ने पुल निर्माण में इस्तेमाल की जा रही बालू समेत अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा निर्माण स्थल पर बनाए गए डायवर्सन को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पर्याप्त और सुरक्षित डायवर्सन की व्यवस्था नहीं होने के कारण आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नाबालिग बच्चे के काम करने का दावा

निरीक्षण के दौरान एक नाबालिग बच्चे को निर्माण कार्य में लगे हुए देखे जाने का भी दावा किया गया है। ग्रामीणों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए निर्माण स्थल पर श्रमिकों की स्थिति और उनकी निगरानी व्यवस्था की जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मिस्त्री से संबंधित कार्य में भी सामान्य लेबर से काम कराया जा रहा है। इन आरोपों के बाद निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता और मौके पर निगरानी की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

जेई पर अभद्र व्यवहार का आरोप

वहीं, ग्रामीण निजाम अंसारी ने जेई पर कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

दूसरी ओर, विभाग ने निर्माण कार्य में किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि लगाए जा रहे आरोप सही नहीं हैं। वहीं, जेई विजय रावानी ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन पर काम दिलाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

तकनीकी जांच की मांग

मौके पर सामने आए दावों और उपलब्ध विजुअल के आधार पर निर्माण सामग्री तथा निर्माण कार्य की स्थिति को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं। हालांकि, निर्माण की गुणवत्ता पर अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। ऐसे में ग्रामीणों और जिला परिषद सदस्य ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

इसके साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, पुल निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, डायवर्सन की व्यवस्था और निर्माण स्थल पर श्रमिकों की स्थिति की भी जांच कराने की मांग की गई है।

कार्रवाई नहीं हुई तो निर्माण रोकने की चेतावनी

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में निर्माण कार्य में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित विभाग को जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग की ओर से मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो सभी ग्रामीण एकजुट होकर निर्माण कार्य बंद कराने का निर्णय ले सकते हैं।

अब पूरे मामले में निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।

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