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मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना से बदली श्रीमती मोती पिंगुवा की जिंदगी

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मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना से बदली श्रीमती मोती पिंगुवा की जिंदगी, बैकयार्ड लेयर कुक्कुट पालन से सालाना ₹70–80 हजार तक की आय

सरकारी योजना का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ीं कुमारडुंगी प्रखंड की महिला लाभुक, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

संतोष वर्मा

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा उनकी आय में वृद्धि करने की दिशा में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के माध्यम से पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी प्रखंड अंतर्गत भोंडा पंचायत के आमड़ा गांव की निवासी श्रीमती मोती पिंगुवा की सफलता की कहानी इसी प्रयास का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

श्रीमती मोती पिंगुवा पहले अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थीं। सीमित संसाधनों और खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना उनके लिए एक चुनौती थी। ऐसी परिस्थिति में उन्होंने स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में उन्हें झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत बैकयार्ड लेयर कुक्कुट पालन योजना की जानकारी मिली। योजना का लाभ प्राप्त कर उन्होंने अपने गांव में ही कुक्कुट पालन को आजीविका के एक नए साधन के रूप में अपनाया।

पंचायत भवन में आयोजित ‘आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार’ कार्यक्रम के दौरान श्रीमती मोती पिंगुवा को मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत 400 मुर्गियों की इकाई का लाभ मिला। पशुपालन विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से कुक्कुट पालन की शुरुआत की। उन्होंने मुर्गियों के बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादन को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया। मुर्गियों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया, समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया तथा आवश्यकता पड़ने पर पशु चिकित्सा संबंधी सलाह भी ली। नियमित देखभाल, मेहनत और उचित प्रबंधन के कारण उनका कुक्कुट पालन व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।

श्रीमती मोती पिंगुवा ने 400 मुर्गियों की इकाई से अपना व्यवसाय शुरू किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने कुछ मुर्गियों को मांस उत्पादन तथा कुछ को अंडा उत्पादन के उद्देश्य से रखा है। इस प्रकार उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों का उपयोग करते हुए अपनी आजीविका को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम उनकी वार्षिक आय में दिखाई दिया। वर्तमान में बैकयार्ड लेयर कुक्कुट पालन से उनकी सालाना आय लगभग ₹70,000 से ₹80,000 तक पहुंच गई है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को सहारा मिला है और उन्हें अपने गांव में ही रोजगार का एक स्थायी माध्यम विकसित करने का अवसर मिला है।

उक्त के संदर्भ में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के माध्यम से पशुपालन को आजीविका का प्रभावी साधन बनाया जा सकता है। श्रीमती मोती पिंगुवा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं अपनी मेहनत और लगन से परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बना सकती हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे तथा उन्हें प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिलें।

अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए श्रीमती मोती पिंगुवा ने कहा,”पहले खेती से इतनी आमदनी नहीं हो पाती थी कि परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सके। ‘आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार’ कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का लाभ मिला। पशुपालन विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मैंने 400 मुर्गियों के साथ कुक्कुट पालन शुरू किया। मुर्गियों की साफ-सफाई, पौष्टिक आहार, समय पर टीकाकरण और नियमित देखभाल का ध्यान रखा। इस काम से अब सालाना लगभग ₹70,000 से ₹80,000 तक की आय हो रही है। मैं चाहती हूं कि गांव की दूसरी महिलाएं भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार अपनाएं और आत्मनिर्भर बनें। श्रीमती मोती पिंगुवा की सफलता गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि आत्मनिर्भरता के लिए बड़े निवेश या बड़े शहरों में रोजगार की तलाश ही एकमात्र रास्ता नहीं है। सही योजना, प्रशिक्षण, स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग और निरंतर मेहनत के माध्यम से गांव में रहकर भी आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। बैकयार्ड लेयर कुक्कुट पालन कम स्तर पर स्वरोजगार शुरू करने का एक उपयोगी माध्यम बन सकता है। अंडे और मांस की मांग के अनुरूप उत्पादन, उचित देखभाल तथा बाजार तक पहुंच के माध्यम से ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका को मजबूत कर सकते हैं।

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