देवघर जिले के सारठ स्थित रामचरित मानस आश्रम पुरुषोत्तम धाम में वैष्णवी दुर्गा पूजा की परंपरा बीते पांच दशकों से पूरी श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाज के साथ निभाई जा रही है। वर्ष 1977 में तत्कालीन महंत सीताराम दास उर्फ कश्मीरी बाबा ने स्थानीय लोगों के सहयोग से इस धार्मिक अनुष्ठान की नींव रखी थी। तब से शुरू हुई यह पावन परंपरा आज भी निरंतर जारी है। वर्तमान में स्थानीय वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति, ग्रामीणों और सारठ बाजार के व्यवसायियों के सामूहिक आर्थिक सहयोग से इस पूजा का आयोजन पूरे हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में करती आ रही है।
सामूहिक सहभागिता और वर्तमान व्यवस्था
वर्तमान महंत रामदास बाबा की देखरेख में आश्रम की इस प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी एक व्यक्ति या परिवार पर निर्भर नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक सहभागिता से संचालित होता है। ग्रामीणों के इसी निस्वार्थ सहयोग की बदौलत करीब 50 साल पुरानी यह धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत आज भी पूरी भव्यता के साथ जीवंत है।
नवरात्र में उमड़ती है महिला श्रद्धालुओं की भीड़
शारदीय नवरात्र के दौरान आश्रम परिसर में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा देखने को मिलती है। दस दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, माता रानी के दरबार में हाजिरी लगाती हैं और चुनरी व श्रृंगार सामग्री अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। प्रतिदिन होने वाली संध्या आरती में भारी भीड़ जुटती है, जिसके उपरांत उपस्थित भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाता है।
सामाजिक समरसता और नई पीढ़ी को प्रेरणा
ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित होने वाला यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर सामाजिक समरसता, आपसी एकता और सामूहिक सहभागिता का सशक्त संदेश देता है। इस परंपरा के माध्यम से क्षेत्र की नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ रही है।
आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्य पवन सिन्हा, किशोरी पोद्दार, उत्तम शर्मा, छोटेलाल साह, प्रदीप सिन्हा, परमेश्वर मंडल, रामदेव साह, मिथिलेश सिन्हा और दीनदयाल समेत कई स्थानीय लोग सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।








