Jharkhand News: झारखंड के धरतीपुत्र और जनजातीय समाज के सबसे बड़े चेहरे, दिशोंम गुरु शिबू सोरेन का 4 अगस्त को निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है। शिबू सोरेन को अंतिम विदाई देने के लिए उनके पैतृक गांव नेमरा (जिला रामगढ़) में जनसैलाब उमड़ रहा है।

राज्य के कोने-कोने से लोग पहुंच रहे हैं, और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। गांव में भावुक माहौल है, और हर कोई अपने प्रिय नेता को अंतिम प्रणाम करने के लिए पहुंच रहा है।
प्रशासन और मुख्यमंत्री की उपस्थिति
रामगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा नेमरा में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। श्रद्धांजलि देने वालों की संख्या को देखते हुए गांव में यातायात, भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था बनाए रखने हेतु अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो दिशोंम गुरु के पुत्र हैं, पितृ धर्म और राज्य धर्म दोनों का निर्वहन कर रहे हैं। वे नेमरा में रहकर न केवल अपने पिता की अंतिम विदाई की तैयारियों में जुटे हैं, बल्कि दूर-दराज से श्रद्धांजलि देने आए लोगों से भी मिल रहे हैं, उनकी बातों को सुन रहे हैं और राज्य की जनता के प्रति अपना दायित्व निभा रहे हैं।
16 अगस्त को होगा श्रद्धाकर्म
दिशोंम गुरु शिबू सोरेन का श्रद्धाकर्म 16 अगस्त को नेमरा में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर राज्यभर से नेताओं, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के शामिल होने की संभावना है। जिला प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है ताकि श्रद्धाकर्म शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हो।
टीवी 45 के संवाददाता ने मौके पर मौजूद लोगों से बातचीत की, जिसमें जनता ने शिबू सोरेन के संघर्ष, योगदान और उनके द्वारा झारखंड को अलग राज्य के रूप में दिलाने के आंदोलन को याद किया।





