HIV Positive: झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग केंद्रीय कारा में एक विचाराधीन कैदी के HIV संक्रमित होने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इसे “मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन“ करार देते हुए जेल प्रशासन की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की है।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला केवल एक कैदी के स्वास्थ्य से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह जेल व्यवस्था में व्याप्त गहरी खामियों को उजागर करता है। अदालत ने 25 सितंबर को इस मामले से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
कोर्ट की टिप्पणी:
अदालत ने मौखिक रूप से कहा, “यह घटना महज एक मेडिकल ट्रेजडी नहीं है, बल्कि यह गंभीर प्रशासनिक विफलता का संकेत देती है। यदि लापरवाही साबित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
मामले की पृष्ठभूमि:
याचिका में बताया गया कि संक्रमित कैदी 2 जून 2023 से जेल में है। शुरुआत में उसे धनबाद मंडल कारा में रखा गया था, लेकिन बाद में 10 अगस्त 2024 को हजारीबाग के लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में स्थानांतरित किया गया। हाल ही में उसकी HIV रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई, जिससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
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अदालत का सवाल:
कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि आखिर यह संक्रमण कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ? क्या जेल में स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे?
अगली सुनवाई:
मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी, जिसमें अदालत के सामने अधिकारी जवाब पेश करेंगे।





