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SC-ST एक्ट के फर्जी मामले में 5 साल की जेल, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

On: December 10, 2025 11:56 AM
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SC-ST एक्ट के फर्जी मामले में 5 साल की जेल, कोर्ट ने लगाया जुर्माना
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अहम फैसले में, स्पेशल जज (SC-ST एक्ट) विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत झूठा केस दर्ज करने के दोषी एक व्यक्ति को पांच साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई। दोषी पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

क्या है मामला?

यह मामला ज़मीन विवाद से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अरविंद मिश्रा ने बताया कि दोषी विकास कुमार ने 29 जून 2019 को थाना पीजीआई में ओम शंकर यादव और अन्य तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उसकी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की नीयत से धमकाया और जातिसूचक गालियां देकर उसे भगा दिया।

जांच में खुली पोल

पुलिस की विवेचना में यह खुलासा हुआ कि घटना के समय आरोपी घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। गवाहों ने भी घटना होने से इनकार किया।

  • मूल विवाद: पता चला कि विकास कुमार के परिवार की ज़मीन बैंक से लिए गए कर्ज के कारण नीलाम हो गई थी।

  • खरीददार: नीलामी में आरोपी ओम शंकर के भांजे कमलेश ने वह ज़मीन खरीदी थी।

  • प्रतिशोध: इसी ज़मीन विवाद के चलते कमलेश की हत्या कर दी गई थी, जिसका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है और ओम शंकर उसकी पैरवी कर रहे थे।

  • दबाव बनाने की साज़िश: जांच में पाया गया कि विकास कुमार ने ओम शंकर पर दबाव बनाने के लिए यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया था।

कोर्ट का कठोर फैसला

जांच में घटना फर्जी पाए जाने पर पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। सबूतों के आधार पर, विशेष न्यायाधीश ने विकास कुमार को एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों के दुरुपयोग का दोषी पाया।

न्यायालय ने सज़ा सुनाते हुए यह भी निर्देश दिया है कि यदि इस मामले में दोषी को कोई राहत धनराशि दी गई हो, तो वह वापस ली जाए।

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि फर्जी मुकदमा लिखवाने के लिए कठोर सज़ा नहीं दी गई, तो लोग एससी/एसटी एक्ट जैसे महत्वपूर्ण कानून के प्रावधानों का लगातार दुरुपयोग करते रहेंगे। यह फैसला वादी को गलत बयानबाजी न करने की भी सख्त चेतावनी देता है।

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