Bihar News: बिहार में सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े के मामलों पर सरकार ने अब कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और रेवेन्यू और लैंड रिफॉर्म्स मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ़ कर दिया है कि न सिर्फ़ कब्ज़ा करने वाले बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारी भी कब्ज़े के लिए ज़िम्मेदार माने जाएँगे।

अफसरों की जेब से होगी वसूली!
विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान विजय सिन्हा ने ‘बिहार पब्लिक लैंड इंक्रोचमेंट एक्ट 1956’ का हवाला देते हुए कहा कि कई बार अधिकारियों की अनदेखी के कारण सरकारी जमीन पर कब्जा होता है। बाद में कोर्ट के आदेश पर जब बुलडोजर चलता है, तो गरीब जनता पिसती है। डिप्टी सीएम ने निर्देश दिया है कि अब जांच कर गैर-जिम्मेवार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जरूरत पड़ने पर उनसे नुकसान की वसूली भी की जाए। उन्होंने स्थानीय थाने और अंचल प्रशासन को ईमानदारी से काम करने की नसीहत दी ताकि अतिक्रमण की नौबत ही न आए।
हर जिले में बनेगा ‘लैंड बैंक’: विजय सिन्हा
सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए मंत्री ने राज्य के सभी जिलों में ‘लैंड बैंक’ बनाने का ऐलान किया है। इसके लिए एक स्पेशल टीम का गठन किया जाएगा, जो सरकारी जमीनों का सत्यापन (Verification) करेगी और उन पर नजर रखेगी।
पेंडिंग केसों के लिए तैनात होंगे अतिरिक्त अधिकारी: विजय सिन्हा
राजस्व न्यायालयों (अंचलाधिकारी से लेकर प्रमंडलीय आयुक्त स्तर तक) में लटके मामलों पर चिंता जताते हुए विजय सिन्हा ने कहा कि जनता को दफ्तरों के चक्कर लगाना मंजूर नहीं है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन न्यायालयों में पेंडिंग केसों की संख्या ज्यादा है, वहां अस्थायी रूप से अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती कर मामलों का जल्द निपटारा किया जाए।
गजेटियर और अन्य कार्यों की समीक्षा
बैठक में जिलों के गजेटियर (Gazetteer) निर्माण की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि सारण का गजेटियर तैयार है, जबकि पटना और दरभंगा का काम अंतिम चरण में है। इसके अलावा चकबंदी और भू-अर्जन जैसे कार्यों को भी समय सीमा के भीतर पूरा करने का आदेश दिया गया है।
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