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नहीं रुकेगी ‘यादव जी की लव स्टोरी’, आज होगी रिलीज

On: February 27, 2026 9:16 AM
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नहीं रुकेगी यादव जी की लव स्टोरी, आज होगी रिलीज
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सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि फिल्म यादव जी की लव स्टोरी रिलीज होगी। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि इस नाम में ऐसे कोई शब्द नहीं हैं जिससे समाज की छवि पर किसी तरह का असर पड़ता है। यानी आज देशभर के सिनेमाघरों में इस भोजपुरी फिल्म को रिलीज किया जाएगा।

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हम आपको बता दें विश्व यादव परिषद ने फिल्म के नाम पर सवाल उठाए थे और कहा था कि यह नाम यदाव समाज को गलत तरीके से पेश कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हाल ही में आई फिल्म ‘घुसखोर पंडित’ से अलग बताया। कोर्ट ने कहा कि घुसखोर शब्द का अर्थ भ्रष्ट होता है जो नकारात्मक है जबकि इस फिल्म में ऐसा कोई शब्द नहीं है।

पिछले कई दिनों से दो फिल्मों ‘घूसखोर पंडित’ और ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के टाइटल को लेकर जगह-जगह काफी बवाल मचा हुआ है। ब्राह्मण और यादव समुदाय के लोग इसे लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और टाइटल हटाने की मांग कर रहे हैं। विवाद इतना बढ़ की मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। इसके बाद कोर्ट ने पहले ‘घूसखोर पंडित’ पर सुनवाई की और फैसला सुनाते हुए मेकर्स को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि मेकर्स को टाइटल बदलना होगा।

‘घूसखोर पंडित’  को आधार बनाते हुए ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के टाइटल पर बैन लगाने या उसे बदलने की मांग वाली अर्जी कोर्ट में दाखिल की गई जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुयान की बेंच ने विश्व यादव परिषद के चीफ की अर्जी को खारिज कर दिया।

कल रिलीज होने वाली इस फिल्म में प्रगति तिवारी लीड रोल में ‘सिंपल यादव’ का किरदार निभा रही है। वहीं विशाल मोहन ‘वसीम अख्तर’ की भूमिका में हैं। फिल्म को लेकर झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में विरोध हो रहा है। कई यादव संगठन इसके नाम और कहानी पर आपत्ति जता रहे हैं।

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इस फिल्म को लेकर याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी की यह फिल्म खुद को सच्ची घटना पर आधारित होने का दावा करती है। इसपर कोर्ट ने फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इस फिल्म में भी गुर्जर समाज को गलत तरीके से दिखाने की आवाज उठी थी लेकिन फिर भी कोर्ट ने उसे बैन करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि यह एक फिक्शन फिल्म है। हफ्ते भर में सब ठीक हो जाएगा। अब लोग ऐसे भी फिल्म देखने थिएटर नहीं जाते वे मोबाइल पर देखते हैं।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि टाइटल से कम्युनिटी के खिलाफ एक गलत स्टीरियोटाइप बनता है । सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे इंटर-कम्युनिटी शादियों का विरोध नहीं करते लेकिन फिल्म में एक महिला को जिस तरह से दिखाया गया है वह मंजूर नहीं है।

अखिल भारतीय यादव महासभा ने भी इस फिल्म का विरोध किया है। इस महासभा के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस फिल्म के माध्यम से समाज की महिलाओं और बेटियों की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। समाज का मानना है कि किसी विशेष जाति को केंद्र में रखकर बनाई गई ऐसी फिल्में सामाजिक समरसता को बिगाड़ती हैं और साथ ही नारी शक्ति का अपमान करती हैं। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यादव समाज का आरोप है कि फिल्म के जरिए उनकी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को गलत तरीके से पेश कर बदनाम किया जा रहा है।

नाम को लेकर हुए विवाद के बाद देशभर में फिल्म की फ्री में पब्लिसिटी हो गई है। अब ये दखने वाली बात होगी कि आज रिलीज होने के बाद ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है।

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