‘ब्रह्म’ का अर्थ है तप या ज्ञान, जबकि ‘चारिणी’ का मतलब है आचरण करने वाली। इस तरह मां ब्रह्मचारिणी वह देवी हैं जो तप का आचरण करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इनकी उपासना से साधक की कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है और जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

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मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और ज्योतिर्मय है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, उनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल शोभायमान रहता है। यह रूप साधना और त्याग का आदर्श प्रस्तुत करता है।
ऐसी मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करते हैं, उनके भीतर तप, संयम, और त्याग जैसे सद्गुण विकसित होते हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्व रखता है जो जीवन में आध्यात्मिक प्रगति की दिशा में अग्रसर होना चाहते हैं।





