देवघर जिले के सारठ अंचल में जमीन की मापी से संबंधित करीब 10 वर्ष पुराने मामले में उपायुक्त के जनता दरबार में शिकायत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हुई है। सारठ अंचल के वाद संख्या 07/2015-16 के आवेदक प्रदीप कुमार लाल ने जमीन की मापी का आदेश बार-बार जारी होने के बावजूद प्रक्रिया लंबित रहने की शिकायत की थी। इसके बाद देवघर के उपायुक्त ने मधुपुर के अनुमंडल पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया।
अनुमंडल पदाधिकारी, मधुपुर ने छह अक्टूबर 2026 को पत्रांक 390 के माध्यम से सारठ के अंचल अधिकारी को मामले में स्थलीय और अभिलेखीय जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पत्र में आवेदन के तथ्यों और जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, मधुपुर की अदालत में सिविल अपील संख्या 68/2004 में 28 जनवरी 2025 को पारित आदेश के आलोक में एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त को भी कार्रवाई से अवगत कराया जाना है।
यह मामला सारठ अंचल के हलका संख्या पांच स्थित प्लॉट संख्या 2176 और 2177 की कुल 12 डिसमिल जमीन की मापी से जुड़ा है। आवेदक का कहना है कि वर्ष 2015-16 में दर्ज वाद में अंचल अधिकारी की ओर से दो बार मापी का आदेश जारी किया गया, लेकिन अब तक मापी नहीं हो सकी है।
उनके अनुसार, अंचल निरीक्षक, राजस्व कर्मचारी और सारठ थाना के स्तर से भी कई बार जांच कराई गई, इसके बावजूद मामला लंबित है। आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि विवाद से संबंधित अन्य रैयत गुणाधर मंडल के मामले को इस वाद में शामिल किए जाने से मापी की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उनका दावा है कि संबंधित जमीन को लेकर विभिन्न न्यायालयों और राजस्व अदालतों में हुई सुनवाई में उन्हें राहत मिली है। हालांकि इन सभी आदेशों और उनके वर्तमान कानूनी प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
आवेदक के अनुसार, वर्ष 2016 से 2024 तक मापी लंबित रहने के दौरान विवाद और उलझ गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में भी इस मामले को लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया था। अब उपायुक्त और अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश के बाद सारठ अंचल कार्यालय की कार्रवाई पर उनकी नजर टिकी है।





