धनबाद में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ की धनबाद जिला इकाई के नेतृत्व में कर्मचारियों ने रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया और कैंडल मार्च निकालकर अपनी मांगों को पूरा करने की आवाज उठाई।
आंदोलनरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नई एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद से पिछले एक वर्ष का वेतन बकाया है। कर्मचारियों का कहना है कि एंबुलेंस के रखरखाव और वेतन भुगतान की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी न तो वाहनों का उचित मेंटेनेंस करा रही है और न ही समय पर कर्मचारियों को वेतन दे रही है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन कर रहे एंबुलेंस चालकों और कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पूर्व में उनकी मांगों को लेकर आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने कैंडल मार्च निकालकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
संघ ने राज्यभर के 108 एंबुलेंस कर्मचारियों के लिए सरकारी स्तर पर न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की मांग की। इसके साथ ही सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को दोबारा बहाल करने और सभी पात्र कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआईसी, ओवरटाइम तथा ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग उठाई गई।
कर्मचारियों ने एक वर्ष के बकाया वेतन का भुगतान जल्द कराने और एंबुलेंस वाहनों के नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री की ओर से पूर्व में दिए गए आश्वासन को लागू करने की मांग दोहराई।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रखने के संकेत
108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में कर्मचारियों की वेतन संबंधी समस्याओं और सेवा शर्तों को लेकर उठे सवालों के बीच आंदोलन का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की अपील की है।
फिलहाल, कर्मचारियों की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगों पर स्वास्थ्य विभाग या संबंधित एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब देखना होगा कि बकाया वेतन भुगतान और अन्य मांगों को लेकर संबंधित विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।






