Anti Naxal Operation: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा पूर्व में बिछाए गए विस्फोटकों का खतरा अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसी कड़ी में सुरक्षा बलों और झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मनोहरपुर प्रखंड के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत बहदा गांव के जंगल से दो शक्तिशाली इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बरामद किए गए हैं। सुरक्षा बलों ने दोनों विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते गुरुवार को पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को बहदा गांव के समीप जंगल में कोयना नदी के किनारे एक पगडंडी पर संदिग्ध विस्फोटक लगाए जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम तत्काल सक्रिय हुई और संबंधित इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया।
सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने पगडंडी के पास जमीन में छिपाकर रखे गए दो शक्तिशाली आईईडी का पता लगाया। इसके बाद सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए दोनों विस्फोटकों को निष्क्रिय किया गया। पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने भी आईईडी की बरामदगी और उन्हें नियंत्रित तरीके से नष्ट किए जाने की पुष्टि की है।
Anti Naxal Operation: जनवरी में मुठभेड़ में मारे गए थे 17 नक्सली
गौरतलब है कि बहदा गांव के आसपास का सारंडा जंगल लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसी वर्ष जनवरी महीने में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में कुख्यात नक्सली अनल दा समेत 17 नक्सली मारे गए थे। इस कार्रवाई को सारंडा क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना गया था।
लगातार चलाए जा रहे अभियान के कारण क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगा है। हालांकि, नक्सलियों द्वारा पूर्व में जंगलों, पगडंडियों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर छिपाकर लगाए गए आईईडी अब भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
ग्रामीणों के लिए भी बना हुआ है खतरा
जंगल में छिपाकर रखे गए आईईडी केवल सुरक्षा बलों के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी गंभीर खतरा हैं। सारंडा के जंगलों में ग्रामीण अक्सर लकड़ी, पत्ते, महुआ और अन्य वन उपज इकट्ठा करने के लिए आवाजाही करते हैं। ऐसे में जमीन के भीतर दबे विस्फोटकों की मौजूदगी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

बहदा गांव के जंगल में दो आईईडी की बरामदगी ने एक बार फिर इस बात को उजागर किया है कि नक्सली गतिविधियां कमजोर पड़ने के बावजूद उनके द्वारा पूर्व में बिछाए गए विस्फोटकों का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई से संभावित खतरे को टालने में सफलता मिली है। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ है कि सारंडा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए जंगल के दुर्गम इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चलाना और पुराने विस्फोटकों को खोजकर निष्क्रिय करना बेहद जरूरी है।
इसे भी पढ़ें- Workers Protest: RKFL के मजदूरों का धरना, JLKM नेता के नेतृत्व में वार्ता







