Bihar Chunav 2025: बिहार चुनाव के प्रचार अभियान के अंतिम दौर में बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में, एनडीए (NDA) के सहयोगी दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव पर एक पुरानी कहावत के जरिए तीखा हमला बोला है।

कहावत के सहारे साधा निशाना
एक चुनावी (Bihar Chunav) सभा (या मीडिया से बातचीत, जैसा भी संदर्भ हो) के दौरान जीतन राम मांझी ने तेजस्वी यादव का जिक्र करते हुए कहा, “बापे पूत पराते घोड़ा, कुछ नहीं तो थोड़ा-थोड़ा”। इस कहावत का आम तौर पर मतलब होता है कि बेटे में पिता के गुण (चाहे अच्छे हों या बुरे) कुछ न कुछ जरूर आते हैं, भले ही पूरी तरह न आएं।
क्या हैं राजनीतिक मायने?
राजनीतिक गलियारों में( Bihar Chunav) मांझी के इस बयान को सीधे तौर पर तेजस्वी यादव की तुलना उनके पिता और RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से करने के तौर पर देखा जा रहा है। NDA नेता लगातार RJD के 15 साल के शासनकाल को ‘जंगल राज’ कहकर हमलावर रहे हैं। मांझी इस कहावत के जरिए संभवतः यह संकेत दे रहे हैं कि तेजस्वी यादव के शासन में भी उनके पिता के कार्यकाल की झलक देखने को मिल सकती है, भले ही वह पूरी तरह वैसा न हो।
NDA का RJD पर लगातार हमला
जीतन राम मांझी का यह बयान NDA की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे लगातार तेजस्वी यादव और RJD को उनके पिछले शासनकाल, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के कथित मुद्दों पर घेर रहे हैं। मांझी खुद पहले महागठबंधन का हिस्सा रह चुके हैं और बाद में NDA में शामिल हुए थे।
जीतन राम मांझी के इस तंज पर फिलहाल तेजस्वी यादव या RJD की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, चुनाव प्रचार के इस गहमागहमी भरे माहौल में इस बयान पर पलटवार होने की पूरी संभावना है।






