पश्चिमी सिंहभूम जिले की राजनीति में कांग्रेस की सक्रियता एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु को कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं का उत्साह और नेताओं की सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है। सात अक्टूबर को जिला मुख्यालय चाईबासा में आयोजित राजनीतिक कार्यक्रमों ने भी जिले की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक जानकारों और पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अब अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सोनाराम सिंकु के नेतृत्व में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
सोनाराम सिंकु के जिला अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस के स्वागत समारोह से लेकर धरना-प्रदर्शन और पुतला दहन जैसे कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी चर्चा में रही है। सात अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ कार्यक्रम में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने को मिला।
पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को जिले में कांग्रेस के संगठनात्मक पुनरुत्थान के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि कांग्रेस अब डेढ़ दशक पहले वाली अपनी राजनीतिक सक्रियता को दोबारा हासिल करने की कोशिश में जुटी है।
मधु कोड़ा दंपती के सामने बढ़ सकती है चुनौती
जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में सोनाराम सिंकु पहले ही अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी और पूर्व सांसद गीता कोड़ा को विधानसभा चुनाव में हराकर विधायक बने सिंकु का राजनीतिक कद क्षेत्र में बढ़ा है। अब जिला कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी भूमिका केवल विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिए से देखें तो कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में सोनाराम सिंकु की सक्रियता का असर पश्चिमी सिंहभूम की व्यापक राजनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में मधु कोड़ा और गीता कोड़ा के राजनीतिक प्रभाव के सामने नई चुनौती खड़ी होने की संभावनाओं पर भी चर्चा होने लगी है। हालांकि इसका वास्तविक असर आगामी चुनावों और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों में ही स्पष्ट होगा।
जिला मुख्यालय से प्रखंडों तक संगठन विस्तार की तैयारी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए सोनाराम सिंकु अब संगठन को ग्रामीण क्षेत्रों तक मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके तहत जिले के विभिन्न प्रखंडों में संपर्क यात्रा शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।

इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाना, संगठन को सक्रिय करना और ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की पहुंच मजबूत करना बताया जा रहा है। यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से आगे बढ़ता है, तो कांग्रेस को आगामी राजनीतिक गतिविधियों में इसका लाभ मिल सकता है।
कांग्रेस और भाजपा के कार्यक्रमों की राजनीतिक चर्चा
सात अक्टूबर को चाईबासा में भाजपा और कांग्रेस के कार्यक्रमों के कारण जिले का राजनीतिक माहौल गर्म रहा। कांग्रेस के कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक प्रदीप यादव की मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। पार्टी समर्थकों ने कार्यक्रम को सफल बताते हुए इसे संगठन की बढ़ती सक्रियता से जोड़कर देखा।
दूसरी ओर भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा संबंधी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी देखने को मिली। दोनों दलों के कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि उनके कार्यक्रम में उमड़ी भागीदारी ने पार्टी की ताकत का संदेश दिया है।
पश्चिमी सिंहभूम की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत
सोनाराम सिंकु के सामने अब विधायक के रूप में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के साथ-साथ जिला अध्यक्ष के तौर पर कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की दोहरी जिम्मेदारी है। वहीं मधु कोड़ा दंपती के लिए भी जिले में बदलते राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता ने पश्चिमी सिंहभूम की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सोनाराम सिंकु की प्रस्तावित प्रखंड संपर्क यात्रा संगठन को कितनी मजबूती देती है और इसका आगामी राजनीतिक मुकाबलों पर कितना असर पड़ता है।








