IEA यानी इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने बाजार में 40 करोड़ बैरल तेल छोड़ने के भरोसा दिया है इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतें नहीं रुक रहीं। नायमेक्स पर कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर के पार पहुंच चुका है। यानी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए रिकॉर्ड तेल भंडार बाजार में जारी करने का असर नहीं दिख रहा है। जानकारों का कहना है कि IEA की पहल के बावजूद कीमतों में ज्यादा या लंबे समय तक कमी आना मुश्किल है।

सामान्य परिस्थितियों में होर्मुज़ स्ट्रेट से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। लेकिन युद्ध और हमलों के कारण सप्लाई में भारी कमी पहले ही आ चुकी है। ईरान युद्ध की वजह से लगभग 200 मिलियन बैरल से अधिक की कमी पहले ही हो चुकी है। और ये कमी IEA द्वारा जारी किए जाने वाले तेल के बड़े हिस्से के बराबर है। इसलिए भंडार से तेल जारी करना केवल थोड़े समय के लिए राहत दे सकता है।
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एक्सपर्ट की मानें तो तेल भंडार जारी करने की खबर पहले से ही ही फैक्टर इन हो चुका है यानी कि बाजार में तेल के भाव में शामिल हो चुका है। इसलिए इससे कीमतों में पहले से ज्यादा गिरावट होने की संभावना कम ही है।
ऐसे में अनुमान है कि IEA के सदस्य देश मिलकर अधिकतम लगभग 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त उत्पादन बढ़ा सकते हैं। लेकिन इससे भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की जो कमी आई है उसकी भरपाई नहीं हो पाएगी।
जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध लंबा खिंचा तो कीमतें ऊपर ही चढ़ेंगी। क्योंक पहले भी IEA के पहल का असर ज्यादा दिनों तक देखने को नहीं मिल था। इससे पहले भी रूस-यूक्रेन युद्ध, 1991 के खाड़ी युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में IEA पांच बार बाजार में तेल भंडार जारी कर चुका है।





