Home झारखंड बिहार राजनीति मनोरंजन क्राइम हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

गरीबों की थाली तक पहुंचने से पहले सड़ गया सरकारी राशन, गिरिडीह एफसीआई गोदाम में 31.58 क्विंटल चना दाल बर्बाद

गरीबों की थाली तक पहुंचने से पहले सड़ गया सरकारी राशन, गिरिडीह एफसीआई गोदाम में 31.58 क्विंटल चना दाल बर्बाद
---Advertisement---

गिरिडीह के तिसरी स्थित एफसीआई गोदाम से सामने आई एक गंभीर लापरवाही ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार जहां करोड़ों रुपये खर्च कर गरीबों तक समय पर खाद्यान्न और आवश्यक राशन सामग्री पहुंचाने का दावा करती है, वहीं तिसरी एफसीआई गोदाम में गरीबों के हिस्से की 31.58 क्विंटल चना दाल गोदाम में ही खराब हो गई। निरीक्षण के दौरान दाल में कीड़े पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि लंबे समय तक उचित रखरखाव और समय पर वितरण नहीं होने के कारण सरकारी खाद्यान्न बर्बाद हो गया।

यह मामला केवल खाद्यान्न की बर्बादी तक सीमित नहीं है बल्कि सरकारी व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। आखिर वह राशन जो जरूरतमंद परिवारों की थाली तक पहुंचना था, गोदाम में सड़ता कैसे रहा?

शुक्रवार को झामुमो प्रखंड अध्यक्ष रिंकू बर्णवाल ने एफसीआई गोदाम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में खराब पड़ी चना दाल देख उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला बताया और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उनका कहना था कि यदि समय पर निगरानी और कार्रवाई होती, तो सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सकता था।

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले से थी। प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी अभिजीत कुमार के अनुसार उन्होंने जुलाई महीने में ही जिला आपूर्ति पदाधिकारी को लिखित पत्र भेजकर सूचित किया था कि 31.58 क्विंटल चना दाल, लगभग 3 क्विंटल चीनी और 542 क्विंटल नमक लंबे समय से गोदाम में पड़े हुए हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। पत्र में तत्काल उठाव और उचित निष्पादन का अनुरोध भी किया गया था ताकि सरकारी खाद्यान्न खराब होने से बच सके।

यदि विभाग को समय रहते इस संभावित नुकसान की जानकारी दे दी गई थी, तो फिर आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या संबंधित अधिकारियों ने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया, या फिर विभागीय समन्वय की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई? यही सवाल अब पूरे मामले का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।

निरीक्षण के बाद झामुमो प्रखंड अध्यक्ष रिंकू बर्णवाल ने कहा कि सरकार गरीबों के लिए पर्याप्त राशन उपलब्ध करा रही है लेकिन कुछ अधिकारियों की लापरवाही के कारण वही राशन गोदामों में खराब हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं न केवल सरकारी धन की बर्बादी हैं, बल्कि सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

वहीं इस मामले में जब संबंधित ठेकेदार आशीष कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने जिम्मेदारी गोदाम प्रबंधन पर डाल दी। उनका कहना था कि गोदाम में रखे खाद्यान्न की सुरक्षा, रखरखाव और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी गोदाम प्रबंधक की होती है। यदि दाल खराब हुई है, तो इसकी जवाबदेही भी गोदाम प्रबंधन की ही बनती है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आ रहे हैं। यदि जुलाई में ही खराब हो रहे राशन की जानकारी विभाग को मिल चुकी थी, तो समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए? गोदाम में रखे खाद्यान्न की नियमित जांच और गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा था? यदि गोदाम प्रबंधन जिम्मेदार है, तो अब तक उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? और सबसे बड़ा सवाल यह कि गरीबों के हिस्से का जो राशन बर्बाद हुआ, उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्यान्न के भंडारण में समय-समय पर निरीक्षण, वैज्ञानिक रखरखाव, उचित वेंटिलेशन और निर्धारित अवधि के भीतर वितरण अत्यंत आवश्यक होता है। इन प्रक्रियाओं में जरा-सी लापरवाही भी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न को अनुपयोगी बना सकती है, जिसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद लाभार्थियों पर पड़ता है।

फिलहाल पूरा मामला जिला प्रशासन की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिका हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य सरकारी फाइलों की तरह केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। क्योंकि यह केवल 31.58 क्विंटल चना दाल के खराब होने का मामला नहीं, बल्कि सरकारी जवाबदेही, सार्वजनिक धन की सुरक्षा और गरीबों के अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न है।

Also Read- सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच संयुक्त रक्षा समझौते

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

शिक्षक दिवस पर रामगढ़ में सम्मानित हुए उत्कृष्ट शिक्षक और मास्टर ट्रेनर, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को सराहा गया

शिक्षक दिवस पर रामगढ़ में सम्मानित हुए उत्कृष्ट शिक्षक और मास्टर ट्रेनर, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को सराहा गया

धूल-मिट्टी में बच्चों के बीच बैठे सांसद सुखदेव भगत, पढ़ाई का दिया मंत्र, बोले- शिक्षा ही गरीबी मिटाने का सबसे मजबूत रास्ता

धूल-मिट्टी में बच्चों के बीच बैठे सांसद सुखदेव भगत, पढ़ाई का दिया मंत्र, बोले- शिक्षा ही गरीबी मिटाने का सबसे मजबूत रास्ता

जामताड़ा-देवघर को जोड़ने वाले 1 करोड़ 80 लाख की लागत से बने एप्रोच रोड और पुल की गुणवत्ता पर फिर उठे गंभीर सवाल, डायवर्सन से नीचे लुढ़का टोटो

जामताड़ा-देवघर को जोड़ने वाले 1 करोड़ 80 लाख की लागत से बने एप्रोच रोड और पुल की गुणवत्ता पर फिर उठे गंभीर सवाल, डायवर्सन से नीचे लुढ़का टोटो

धनबाद: रंजय सिंह हत्याकांड में 9 साल 9 महीने और 337 तारीखों के बाद भी नहीं आया फैसला

धनबाद: रंजय सिंह हत्याकांड में 9 साल 9 महीने और 337 तारीखों के बाद भी नहीं आया फैसला

JPSC-JSSC विवाद पर भाजपा का झारखंड सरकार को अल्टीमेटम, छात्रों के समर्थन में राज्यभर में आंदोलन की चेतावनी

JPSC-JSSC विवाद पर भाजपा का झारखंड सरकार को अल्टीमेटम, छात्रों के समर्थन में राज्यभर में आंदोलन की चेतावनी

JPSC घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते को कोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज

JPSC घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को कोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज

Leave a Comment