झारखंड के गुमला जिले के पालकोट प्रखंड में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खुद को साइबर क्राइम शाखा का पुलिस अधीक्षक (एसपी) बताने वाले ठगों ने एक पूर्व प्राचार्य को उनके बेटे की गिरफ्तारी का भय दिखाकर 90 हजार रुपये ठग लिए। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पीड़ित ने पालकोट थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हुए ठगी गई राशि वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पालकोट प्रखंड के नाथपुर जुड़ाटोली निवासी दुनेश साहू, पिता इंजोतपाल साहू, किशोरी मोहन लाल सरस्वती विद्या मंदिर, कैम्बा टेंगरिया के पूर्व प्राचार्य रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके व्हाट्सऐप पर एक कॉल आया। कॉल रिसीव करते ही सामने वाले व्यक्ति ने खुद को साइबर क्राइम शाखा का पुलिस अधीक्षक बताते हुए दावा किया कि उनके बेटे को एक गंभीर अपराध में गिरफ्तार किया गया है और उसे 15 वर्ष तक की गैर-जमानती सजा हो सकती है।
ठग ने बातचीत के दौरान किसी युवक के रोने की आवाज भी सुनाई। आवाज सुनकर दुनेश साहू को लगा कि वह उनके बेटे की ही आवाज है। इसके बाद कॉल करने वाले ने उन्हें फोन काटने से मना किया और कहा कि यदि वे तुरंत एक लाख रुपये भेज देंगे तो उनके बेटे को छोड़ दिया जाएगा।
बेटे की चिंता में घबराए दुनेश साहू ने बिना किसी से पुष्टि किए ठगों के बताए बैंक खाते में 90 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसे भेजने के कुछ देर बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया तो पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और रांची में मौजूद है। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही दुनेश साहू पालकोट थाना पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की। उन्होंने प्रशासन से ठगी गई राशि वापस दिलाने तथा साइबर अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। समाचार लिखे जाने तक मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की प्रक्रिया चल रही थी।
लगातार बदल रहे साइबर ठगी के तौर-तरीकों के बीच पुलिस लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है। साइबर अपराधी अब पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और भावनात्मक दबाव बनाकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।
यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, साइबर क्राइम, सीबीआई या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर पैसे की मांग करता है, तो घबराने के बजाय पहले अपने परिजनों से संपर्क करें और स्थानीय पुलिस से जानकारी की पुष्टि करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से सूचना दें। समय पर शिकायत करने से राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
झारखंड में हर महीने औसतन 900 से अधिक यानी प्रतिदिन लगभग 30 से 66 साइबर ठगी और आर्थिक धोखाधड़ी की घटनाएं दर्ज की जाती हैं। सरकारी और एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, डायल-1930 हेल्पलाइन और झारखंड पुलिस के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पोर्टल पर लगातार हर रोज दर्जनों नए मामले सामने आते हैं
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