झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी JPSC और JSSC भर्ती विवाद की गूंज के बीच हंगामेदार रहा। विपक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सीबीआई जांच की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। “CBI जांच करना होगा, कराना होगा” के नारों से सदन गूंजता रहा, जिसके चलते प्रश्नकाल सुचारु रूप से नहीं चल सका। विधानसभा अध्यक्ष को पहले कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई, लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण दिनभर की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। अब मानसून सत्र की अगली बैठक सोमवार यानी 10 अगस्त को शुरू होगी।

पांच कार्य दिवसों वाले इस छोटे मानसून सत्र में पहले से ही तीखी राजनीतिक टकराहट के संकेत थे। शुक्रवार को विपक्ष ने इन आशंकाओं को सही साबित करते हुए जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेर लिया। विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और लगातार नारेबाजी करते रहे, जिससे सदन की सामान्य कार्यवाही प्रभावित हुई।
हंगामे के बीच वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 8399 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। हालांकि बजट पेश होने के बाद भी विपक्ष का विरोध जारी रहा और कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।
सदन के बाहर भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। भाजपा नेताओं ने कहा कि छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगों को सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा टूट चुका है। उन्होंने कहा कि भर्ती घोटालों के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो उसे जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को छात्रों की बात सुन रही है और सही दिशा का कार्रवाई कर रही है विपक्ष को भरोसा रखनी चाहिए और धैर्य के साम करना चाहिए।
दरअसल, जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले 14 दिनों से छात्र संगठन लगातार आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और युवाओं का विश्वास बहाल हो। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि जिन मामलों में शिकायतें मिली हैं, उनकी जांच राज्य स्तर पर कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
मानसून सत्र के दूसरे दिन भी हंगामे के कारण सदन का अधिकांश समय राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ गया। ऐसे में अब सभी की निगाहें 10 अगस्त को होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म होता है या जेपीएससी-जेएसएससी का मुद्दा आगे भी विधानसभा की कार्यवाही पर भारी पड़ता है।
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