झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर जारी छात्र आंदोलन शुक्रवार को उस समय नए विवाद में घिर गया जब राजधानी रांची में प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी गई। यह घटना बिरसा चौक के समीप उस वक्त हुई जब रिवॉल्यूशन यूथ एसोसिएशन (RYA), एसएफआई और आइसा समेत वामपंथी छात्र-युवा संगठनों का मार्च विधानसभा की ओर बढ़ रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्याही फेंके जाने के बाद कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान “जय श्री राम” के नारे भी लगाए गए। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया और घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने पहले से जारी छात्र आंदोलन को और अधिक राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि छात्र संगठनों ने पहले ही 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव का आह्वान कर रखा है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं रही और लगातार सामने आ रही कथित गड़बड़ियों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। विधानसभा घेराव से पहले निकाले गए इस मार्च के दौरान हुई स्याही फेंकने की घटना ने आंदोलन की दिशा और चर्चा दोनों को बदल दिया है।
घटना के बावजूद नेहा बोरा पीछे नहीं हटीं। उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचकर भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात की और कहा कि इस तरह की घटनाएं आंदोलन को कमजोर नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस और पेलेट गन का सामना करने के बाद भी छात्र नहीं डरे थे इसलिए स्याही फेंकने जैसी घटना से आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
नेहा बोरा ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की भी मांग की। उनका कहना था कि जब भी किसी परीक्षा में पेपर लीक या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो केवल निजी एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इधर झारखंड सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत को लेकर भी गतिरोध बना हुआ है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वार्ता केवल छात्रों और उनके अधिकृत प्रतिनिधियों के साथ ही होगी। छात्र प्रतिनिधिमंडल में पत्रकारों, वकीलों और अन्य विशेषज्ञों को शामिल किए जाने पर सरकार ने आपत्ति जताई है। ऐसे में वार्ता की प्रक्रिया अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
गौरतलब है कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर झारखंड में पिछले कई दिनों से छात्र आंदोलन तेज है। अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं और राज्य के विभिन्न हिस्सों से युवाओं का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।
अब सभी की निगाहें 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेता है। फिलहाल स्याही फेंकने की घटना ने इस पूरे आंदोलन को नई राजनीतिक बहस और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के केंद्र में ला दिया है। स्याही फेंकने वाले युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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