कोयलांचल धनबाद में एक बार फिर भू-धसान की भयावह घटना ने लोगों को दहशत में डाल दिया। कतरास थाना क्षेत्र के गोविंदपुर इलाके में अचानक जमीन धंसने से आधा दर्जन से अधिक घर देखते ही देखते धरती में समा गए। इस हादसे में लोगों के घरों के साथ वर्षों की मेहनत से जुटाया गया कीमती सामान भी मलबे और जमीन के भीतर दब गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि अधिकांश परिवार समय रहते घरों से बाहर निकल गए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इलाके में अचानक जमीन में तेज कंपन और दरारें दिखाई देने लगीं। देखते ही देखते कई मकानों की दीवारें दरकने लगीं और कुछ ही मिनटों में आधा दर्जन घर जमीन में धंस गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागे, जबकि कई परिवारों का घरेलू सामान, फर्नीचर और अन्य जरूरी वस्तुएं मलबे के नीचे दब गईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन कमजोर हो गई है, जिससे भू-धसान का खतरा और बढ़ गया है। कई अन्य मकानों में भी दरारें पड़ चुकी हैं और आसपास के लोग भय के साये में जीवन बिता रहे हैं। लोगों को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में और भी मकान इसकी चपेट में आ सकते हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब कलेक्टर गोविंदपुर या धनबाद के खनन क्षेत्रों में इस तरह की घटना हुई हो। इससे पहले भी भू-धसान के कारण कई मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कई परिवारों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार ऐसी घटनाएं होने के बावजूद जिला प्रशासन और बीसीसीएल की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से सुरक्षित पुनर्वास और भू-धसान प्रभावित क्षेत्रों की वैज्ञानिक जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी निराकरण नहीं हो सका है।
घटना के दौरान एक और भयावह दृश्य उस समय सामने आया, जब मीडिया पीड़ित परिवारों से बातचीत कर रही थी। इसी बीच एक अन्य मकान भी धीरे-धीरे जमीन में धंसने लगा। यह दृश्य देखते ही वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई और सभी सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि पूरे इलाके में अभी भी खतरा बना हुआ है।
कोयलांचल धनबाद में भू-धसान की लगातार बढ़ती घटनाएं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने भूमिगत खनन क्षेत्रों, लगातार हो रही बारिश और कमजोर होती जमीन के कारण ऐसे हादसों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में प्रभावित इलाकों की नियमित निगरानी, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, सुरक्षित पुनर्वास और समय रहते लोगों को सतर्क करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल कलेक्टर गोविंदपुर के लोग भय और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। हर बारिश के साथ उन्हें अपने आशियाने के धरती में समा जाने का डर सताने लगा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार एजेंसियां इस बार कोई ठोस और स्थायी कदम उठाएंगी, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था की नींद खुलेगी।
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