लोहरदगा शहर में इस बार गर्मी शुरू होने से पहले ही जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोयल और शंख नदी का जलस्तर मार्च के पहले पखवाड़े में ही तेजी से नीचे जाने लगा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। करीब 6000 परिवारों पर असर की आशंका है। नगर परिषद पानी की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश में जुट गई है।

दरअसल लोहरदगा शहर की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह शहरी जलापूर्ति योजना पर निर्भर है। शहर में पानी की आपूर्ति मुख्य रूप से कोयल और शंख नदी से होती है। दोनों ही नदियां बरसाती प्रकृति की हैं, इसलिए बरसात खत्म होने के बाद धीरे-धीरे इनका जलस्तर कम होने लगता है। सामान्य वर्षों में इतना पानी जरूर बचा रहता है कि जलापूर्ति व्यवस्था किसी तरह चलती रहे, लेकिन इस बार मार्च की शुरुआत में ही नदियों का जलस्तर तेजी से गिरने लगा है।
शहर में शहरी जलापूर्ति योजना के तहत लगभग 3000 घरों में वैध जलापूर्ति कनेक्शन है, जबकि करीब 3000 घरों में अवैध कनेक्शन भी जुड़े हुए हैं। इस तरह करीब 6000 परिवार सीधे तौर पर इसी जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भर हैं। नदियों का जलस्तर घटने से इन सभी परिवारों के सामने पानी की किल्लत की आशंका गहराने लगी है।
नगर परिषद भी इस स्थिति को लेकर सतर्क है। नगर परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष और प्रशासक दोनों ही कोयल और शंख नदी का दौरा कर स्थिति का जायजा ले चुके हैं। हालांकि नगर परिषद की ओर से वैकल्पिक उपायों की बात कही जा रही है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट कर रहे हैं।
नगर परिषद के अनुसार लोहरदगा शहर में प्रतिदिन करीब साढ़े पांच लाख गैलन पानी की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान में केवल तीन लाख गैलन पानी की ही आपूर्ति हो पा रही है। शहर में तीन वॉटर टावर के माध्यम से जलापूर्ति की जाती है, लेकिन पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल परिसर स्थित वॉटर टावर जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था और प्रभावित हो रही है। वहीं शहरी जलापूर्ति योजना की रफ्तार भी बेहद धीमी बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अप्रैल तक नदियों का जलस्तर इसी तरह गिरता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है और जलापूर्ति व्यवस्था को बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। संभावित संकट को देखते हुए नगर परिषद की ओर से वॉटर टैंकर और सोलर आधारित जलापूर्ति योजना जैसे वैकल्पिक उपायों पर जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद शहर में जल संकट की आशंका को लेकर लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।





