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देशभर में आज धूमधाम से मनाया जा रहा है महाशिवरात्रि का पर्व

On: February 15, 2026 2:38 PM
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देशभर में आज धूमधाम से मनाया जा रहा है महाशिवरात्रि का पर्व
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देशभर में आज धूमधाम से महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। देश भर के शिवालयों में आज सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। देवघर में घंटों की प्रतीक्षा के बाद भक्त बाबा भोले पर जल अर्पण कर रहे हैं। देवघर, धनबाद, जामताड़ा, जमशेदपुर जैसे शहरों में भव्य शिव बारात की तैयारी अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। आज शाम शिव बारात निकलेगी। जिन रास्तों से शिव बारात गुजरेगी, उन्हें अच्छी तरह से सजाया गया है। महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। आज शिव भक्त भगवान शिव की आराधना में पूरी रात जागरण करते हैं, व्रत रखते हैं और अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं।

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महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं? महाशिवरात्रि का महत्व कई पौराणिक कथाओं से जुड़ा है

शिव-पार्वती विवाह: इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह दांपत्य सुख, प्रेम और पारिवारिक सौभाग्य का प्रतीक है।
समुद्र मंथन: जब हलाहल विष निकला, तो भगवान शिव ने उसे कंठ में धारण किया। इस दिन उनकी पूजा से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शिव तांडव: भगवान शिव ने इस रात तांडव नृत्य किया था।
शिकारी की कथा: एक शिकारी ने अनजाने में बेल पत्र चढ़ाकर शिव की पूजा की और मोक्ष प्राप्त किया। इससे सिद्ध होता है कि सच्ची भक्ति से कोई भी मुक्ति पा सकता है।
यह त्योहार अज्ञान को दूर कर ज्ञान का दीप जलाने का प्रतीक है। व्रत और जागरण से मनुष्य अपने भीतर के शिव तत्व को जागृत करता है।

भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय

दिनभर: सुबह से शाम किसी भी वक्त पूजा कर सकते हैं
पूजा मुहूर्त निशीथ काल पूजा : 15 फरवरी की रात 12:09 बजे से 16 फरवरी की सुबह 1:01 बजे तक।

रात्रि के चार प्रहर (चारों में पूजा करने का विधान है)

पहला प्रहर: शाम 6:23 बजे से 9:32 बजे तक
दूसरा प्रहर: 9:32 बजे से 12:41 बजे (रात) तक
तीसरा प्रहर: 12:41 बजे से 3:47 बजे (सुबह) तक
चौथा प्रहर: 3:47 बजे से 6:59 बजे तक

पारण समय यानी व्रत खोलने का समय

16 फरवरी को सुबह सूर्योदय के बाद। लेकिन चतुर्दशी समाप्त होने से पहले (आमतौर पर सुबह 6:59 बजे से दोपहर तक)। निशीथ काल में पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है क्योंकि इसी समय भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे।

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