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झारखंड के एक गांव में सड़क नहीं होने से भीमसाई मुंडा की दर्दनाक मौत, हॉस्पिटल जाने के लिए 4 कंधों का सहारा

On: February 15, 2026 4:37 PM
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झारखंड के एक गांव में सड़क नहीं होने से भीमसाई मुंडा की दर्दनाक मौत, हॉस्पिटल जाने के लिए 4 कंधों का सहारा
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सड़क नहीं होने से शनिवार को 48 वर्षीय भीमसाई मुंडा की दर्दनाक मौत हो गई। झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित लालमाटी गांव के रहने वाले भीमसाई मुंडा को हॉस्पिटल ले जाने के लिए 4 कंधों का सहारा लेना पड़ा। तबियत ज्यादा खराब होने की वजह से उन्हें मुख्य मार्ग तक पहुंचाने के लिए चार कंधों का सहारा लेना पड़ा। क्योंकि लालमाटी गांव आज भी सड़कहीन है। मुख्य मार्ग से करीब 10 किलोमीटर दूर बसे इस गांव तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पगडंडियों, पहाड़ी और उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ता है। यहां एंबुलेंस और वाहन केवल नाम के हैं। असली सहारा आज भी ग्रामीणों के कंधे हैं।

सड़क नहीं होने से जिंदगी खोई

भीमसाई मुंडा की दर्दनाक कहानी ने यह सच्चाई फिर से उजागर कर दी। अचानक तबीयत बिगड़ने पर गांव के चार ग्रामीणों ने उन्हें खाट पर लिटाया और कंधे पर उठाकर लगभग 10 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से उन्हें गुमला सदर अस्पताल ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज में देरी हुई। लगातार बिगड़ती हालत के बीच भीमसाई मुंडा ने सदर अस्पताल में ही अंतिम सांस ली।

मौत के बाद भी संघर्ष

मृत्यु के बाद भी उनका शव सम्मानजनक तरीके से घर तक नहीं पहुंच सका। एंबुलेंस शव को केवल मुख्य मार्ग तक ही ले जा सकी। गांव तक सड़क न होने के कारण वाहन आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद फिर चार कंधों ने जिम्मेदारी संभाली। खाट पर शव रखकर ग्रामीणों ने पथरीले, पहाड़ी और कठिन रास्तों से 10 किलोमीटर पैदल चलकर उन्हें गांव तक पहुंचाया। ग्रामीण कहते हैं, “लालमाटी में एंबुलेंस का मतलब वही कंधे हैं। चाहे कोई गंभीर रूप से बीमार हो या किसी की मौत हो जाए, अस्पताल तक पहुंचाने और वापस लाने का एकमात्र साधन खाट ही है।”

ग्रामीणों की जिंदगी बरसात में और कठिन

करीब 150 की आबादी वाले इस गांव में अधिकतर आदिवासी परिवार रहते हैं। बरसात में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। कई बार गर्भवती महिलाओं को भी बहंगी या खाट के सहारे अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे जच्चा और बच्चा की जान पर खतरा बना रहता है। ग्रामीण सवाल उठाते हैं और मांग करते हैं कि जब सरकार गांव-गांव सड़क और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करती है तो लालमाटी तक सड़क कब पहुंचेगी?

एक परिवार की त्रासदी और खराब सड़क व्यवस्था पर सवाल

भीमसाई मुंडा की जिंदगी और मौत का यह सफर केवल एक परिवार की दुखद कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, जिसमें आज भी 10 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए चार कंधों की मदद लेनी पड़ती है। लालमाटी की यह दर्दनाक घटना ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और सरकारी दावों की हकीकत को सामने लाती है।

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