लोहरदगा शहर (Lohardaga town) में विकास और बेहतर सड़कों की तस्वीर के बीच हरमू-भक्सो स्थित मुक्ति धाम तक पहुंचने वाली सड़क एक अलग कहानी बयां करती है। यह वही रास्ता है, जहां से लोग अपने अपनों को अंतिम विदाई देने के लिए लेकर जाते हैं, लेकिन रास्ते की बदहाली अंतिम सफर को भी मुश्किल बना रही है। लोहरदगा शहर (Lohardaga town) में जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी सड़क और ऊबड़-खाबड़ रास्ता इस मार्ग की पहचान बन चुका है। मुक्ति धाम तक पहुंचने के लिए शव वाहन को कई जगह गड्ढों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। लोहरदगा शहर (Lohardaga town) में अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को भी रास्ते में संभलकर चलना पड़ता है। सड़क की स्थिति ऐसी है कि सामान्य दिनों में भी दोपहिया और चारपहिया वाहनों के आवागमन में परेशानी होती है। जब इसी रास्ते से शव यात्रा गुजरती है, तब समस्या और गंभीर हो जाती है।
किसी परिवार के लिए अंतिम विदाई का समय पहले ही बेहद भावुक और कठिन होता है। ऐसे में जब मुक्ति धाम तक पहुंचने के रास्ते में गड्ढे और असमतल सड़क सामने आती है, तो परेशानी और बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार शव को ले जाते समय सड़क की खराब स्थिति के कारण सावधानी बरतनी पड़ती है। उबड़-खाबड़ रास्ते के कारण शव को ले जाने में भी असुविधा होती है।बरसात के दौरान इस मार्ग की स्थिति और खराब हो जाती है। बारिश का पानी सड़क पर जमा होने के साथ कई जगह कीचड़ भी बन जाता है। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क पर गड्ढा कितना गहरा है और कहां रास्ता समतल है। पैदल चलने वालों के साथ शव वाहन को भी पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।
जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुक्ति धाम तक पहुंचने वाली सड़क की बदहाली कोई नई समस्या नहीं है। लंबे समय से सड़क की मरम्मत और बेहतर निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों का कहना है कि शिकायत और मांग के बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उनका मानना है कि बार-बार मरम्मत के बजाय इस मार्ग का स्थायी निर्माण किया जाना चाहिए। मुक्ति धाम तक जाने वाली सड़क को स्थानीय लोग केवल आवागमन का रास्ता नहीं मानते। उनके लिए यह वह मार्ग है, जिससे शहर के लोग अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने पहुंचते हैं। इसलिए इस सड़क की स्थिति सीधे तौर पर नागरिक सुविधा के साथ संवेदनशीलता से भी जुड़ी है। लोगों का कहना है कि शहर की व्यवस्था में ऐसे मार्गों को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए, जितना अन्य प्रमुख सड़कों को दिया जाता है।
स्थानीय लोगों ने नगर परिषद और संबंधित विभाग से मुक्ति धाम तक जाने वाली सड़क का स्थायी निर्माण कराने की मांग की है। इसके साथ ही सड़क पर जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए बेहतर नाली और जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की मांग भी की गयी है। लोगों का कहना है कि सड़क बनने के साथ जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो बरसात में समस्या दोबारा खड़ी हो सकती है। मुक्ति धाम तक जाने वाला यह रास्ता शहर की उस बुनियादी जरूरत की ओर ध्यान दिलाता है, जिसे अक्सर सामान्य आवागमन की भीड़ में नजरअंदाज कर दिया जाता है।
जिस सड़क से लोग जीवन के अंतिम पड़ाव तक अपने परिजनों को लेकर पहुंचते हैं, उसका सुरक्षित और सुगम होना जरूरी है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस समस्या को कब तक दूर करता है और मुक्ति धाम की राह कब गड्ढों से निकलकर एक बेहतर और सम्मानजनक रास्ते में बदलती है।
सबसे बड़ा सवाल यहां से मात्र 700 मीटर की दूरी में डीसी ऑफिस, लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी में नगर परिषद का कार्यालय, बगल में लोहरदगा का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन, और इसी रास्ते से सैकड़ो लोग जो है जाना ना करते है।
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