जब कोई भी आम नगरिक वोट देता उसको अपने उम्मिदवार से क्या चाहिए। बस एक अच्छा नली – गली और में बिजली की उपल्बधता और एक अच्छी पक्की सड़क (paved road) लेकिन वही पक्की सड़कें (paved road) जब सवाल बन जाए तो जवाब कौन देगा? नगर पंचायत या ग्राम पंचायत आखिर किस के पास आम जनता के सवाल के जवाब होगा। यहि सवाल दुमका के निवासी के पास है। दुमका के रंगालिया पंचायत के मसानपाड़ा गांव में पक्की सड़क पक्की सड़क(paved road) नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। यह गांव मसानजोर डैम बनने के समय विस्थापित हुए मयूराक्षी के परिवारों को बसाया गया था, लेकिन आज तक यहां तक पक्की सड़क पक्की सड़क(paved road)नहीं बनी। अब एमएलबीसी नहर के बाएं तट पर चल रहे पक्कीकरण कार्य के कारण बचा-कुचा कच्चा रास्ता भी पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गया है। बरसात में पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
गांव निवासी सुनील किस्कू, जो काफी दिनों से बीमार थे, की अस्पताल से लौटते वक्त मौत हो गई। परिजन उन्हें एंबुलेंस से घर ला रहे थे, लेकिन कीचड़ भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव के बाहर ही रुक गई। मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों को उन्हें खटिया पर टांग कर कंधे के सहारे घर ले जाना पड़ा, रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि पक्की सड़क की मांग को लेकर उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले वोट बहिष्कार का भी ऐलान किया था। तब कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता, बीडीओ और मुखिया गांव पहुंचे थे और सड़क निर्माण का आश्वासन दिया था। सर्वे कराकर डीपीआर तैयार कर विभाग को भेजा भी गया, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिलने से सड़क नहीं बन सकी है।
इस संबंध में रंगालिया पंचायत के मुखिया जीसू बास्की ने बताया कि रास्ते का कार्य डीपीआर में शामिल है और आगे कार्य कराया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन और निर्माण एजेंसी से मांग की है कि रास्ते को जल्द दुरुस्त कराया जाए ताकि भविष्य में मरीजों, बुजुर्गों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।सबसे ज्यादा कीचड़ हुआ है एमएलबीसी बाया तट में पक्कीकरण कार्य चल रहा है इसमें बड़े-बड़े मशीन ले जाते हैं जिस कारण से और ज्यादा कीचड़ हो गया है





