लातेहार जिले के मनिका प्रखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पलामू भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने विशुनबांध एवं बरकाडीह पंचायत के पंचायत सेवक नागेश्वर रजक को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रखंड कार्यालय सहित संबंधित पंचायतों में हड़कंप मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत सेवक नागेश्वर रजक पर एक सरकारी कार्य कराने के एवज में एक लाभुक से 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। रिश्वत की मांग से परेशान लाभुक ने इसकी शिकायत पलामू एसीबी से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने मामले का गोपनीय सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए।
सत्यापन के बाद एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। बुधवार को मनिका प्रखंड कार्यालय में चल रही बैठक के दौरान जैसे ही पंचायत सेवक ने शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत ली, पहले से मौजूद एसीबी की टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद एसीबी की टीम आरोपी पंचायत सेवक को अपने साथ पूछताछ के लिए ले गई। इस कार्रवाई की खबर फैलते ही मनिका प्रखंड कार्यालय और संबंधित पंचायतों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्रवाई की चर्चा होती रही।
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे भी ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
झारखंड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर साल औसतन 30 से 35 सरकारी कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े जाते हैं। हालांकि दर्ज होने वाले मामलों की कुल संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि कई मामलों की औपचारिक शिकायतें दर्ज नहीं हो पाती हैं।
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