झारखंड आंदोलनकारी और पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने राजधानी रांची के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ बड़े जनआंदोलन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगस्त क्रांति का महीना है और झारखंड की धरती सदियों से संघर्ष, प्रतिरोध और जनआंदोलनों की गवाह रही है। ऐसे में अब राज्य में एक नए उलगुलान की जरूरत है।
सूर्य सिंह बेसरा ने बाबा तिलका मांझी, बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव, नीलांबर-पीतांबर और सिंदुराय जैसे वीर योद्धाओं के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए युवाओं को संगठित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड बचाओ-झारखंड बनाओ समिति के बैनर तले ‘भ्रष्टाचार मिटाओ, झारखंड बचाओ’ आंदोलन चलाया जाएगा।
बेसरा के अनुसार, आंदोलन को केवल राजधानी तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसके तहत झारखंड के वीर योद्धाओं से जुड़े गांवों में जाकर युवाओं को आंदोलन से जोड़ा जाएगा और जनसमर्थन जुटाया जाएगा। उन्होंने इसे झारखंड के अधिकार, आदिवासी हित और भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने की बात कही।
उन्होंने बताया कि आंदोलन की औपचारिक शुरुआत 1 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू से की जाएगी। इसके बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में अभियान चलाया जाएगा। 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर रांची के मोरहाबादी मैदान में बड़े कार्यक्रम के साथ अभियान के समापन की योजना है। बेसरा ने दावा किया कि इस कार्यक्रम में झारखंड की छोटी राजनीतिक पार्टियों के साथ विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक समूह भी एकजुट होकर हिस्सा लेंगे।
आदिवासी हितों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरते हुए सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री आदिवासी हितों से जुड़े सवालों पर मुखर होकर काम नहीं करते हैं, तो उन्हें सत्ता से हटाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने युवाओं और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
हाल के दिनों में भी सूर्य सिंह बेसरा झारखंड में भ्रष्टाचार, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्र आंदोलनों को लेकर सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। जुलाई में उन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े मामलों की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई थी।
बेसरा ने कहा कि प्रस्तावित आंदोलन का उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव और झारखंड के लोगों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करना है। अब निगाहें 1 नवंबर को उलिहातू से होने वाली प्रस्तावित शुरुआत और उसके बाद राज्यभर में आंदोलन के विस्तार पर रहेंगी।
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